पलिया कलां(खीरी) गोला गोकर्णनाथ ( खीरी)‎ बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड चीनी मिल गोला के परिक्षेत्र पहाड़पुर, मैलानी, खुटार आदि में डा. अवधेश डागर, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक गन्ना शोध केन्द्र, मुजफ्फरनगर, अशद शेख, ए जी एम केन कॉरपोरेट, राकेश यादव इकाई प्रमुख, वरिष्ठ महाप्रबंधक गन्ना पी एस चतुर्वेदी के साथ क्षेत्र का भ्रमण किया गया । भ्रमण के दौरान फसल की स्थिति, रोग कीट, गन्ने की बंधाई, तथा किसानों से संवाद स्थापित किए गए। गन्ने की बढ़वार, फसल की रोग कीट की स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया गया तथा कृषकों को महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। डा. अवधेश डागर द्वारा कृषकों को बताया गया कि इस समय गन्ने की फसल में बंधाई एवं मिट्टी चढ़ाई का कार्य अत्यन्त आवश्यक है। जिससे फसल गिरने से बचती है तथा उपज में वृद्धि होती है। मिट्टी चढ़ाने के उपरान्त बंधाई करते समय इन बातों का ध्यान रखें कि जब गन्ना 5 फिट का हो जाये तो भूमि स्तर से 2 फिट ऊपर सूखी पत्तियों द्वारा पहली बंधाई करें तथा दूसरी बंधाई अगस्त माह में पहली बंधाई से लगभग 1.5 (डेढ फिट) फिट ऊपर करनी चाहिये तथा तीसरी बंधाई अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में कैंची विधि द्वारा करनी चाहिए। साथ ही साथ बताया गया कि गन्ना फसल में पत्ती उतारने (डीट्रेशिंग) के दौरान गन्ने की सूखी एवं नीचे की ही पत्तियों को हटायें, हरी पत्तियों को कदापि न हटायें, क्योंकि हरी पत्तियां ही गन्ने का भोजन बनाती हैं। सूखी पत्तियां हटाने से कीटों के छिपने का स्थान कम हो जाता है। खेत में हवा एवं प्रकाश का अच्छा संचार होता है। दवा छिड़काव तथा अन्य कृषि कार्यों में सुविधा होती है। बैक्टीरियल टॉप रॉट के लक्षण के विषय में बताया कि गन्ने की बीच की गोफ नीचे से सड़कर सूखने लगती है। गोफ को खींचकर सूंघने से तीक्ष्ण बदबूदार गन्ध आती है, जिसके नियन्त्रण हेतु स्ट्रेक्टोसाइक्लिन का 0.01 प्रतिशत एवं कॉपर आक्सीक्लोराइड 0.1 प्रतिशत (30 ग्राम स्ट्रेक्टोसाइक्लिन + 300 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड का 300 लीटर पानी के साथ) घोल का प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने का सुझाव दिया। इकाई प्रमुख द्वारा कृषकों से अपील की गई कि शरदकालीन गन्ना बुआई में अधिक से अधिक रकवे में गन्ने की उन्नतशील प्रजाति को. लख. 14201 की ट्रेन्च विधि द्वारा बुवाई करें। चीनी मिल के वरिष्ठ महाप्रबन्धक गन्ना, पी.एस. चतुर्वेदी द्वारा बताया कि जिन खेतों में गेहूं कटाई के बाद देर से गन्ने की बुआई की गई है, तो उनमें एनपीके (0:52:34) की स्प्रे करें यदि पहली स्प्रे हो चुकी हो तो अब एनपीके (0:0:50) की स्प्रे कर दें तथा जिन खेतों में खरपतवार / घास है उन खेतों की निराई गुड़ाई अवश्य करा दें, जिससे अधिक उपज प्राप्त हो। यदि गन्ना फसल में पोक्का बोइंग के लक्षण दिखाई दे ‘तो कॉपर आक्सीक्लोराइड (50 WP) के 0.2 प्रतिशत घोल (800 ग्राम फफूंदीनाशी तथा 400 लीटर पानी) के साथ प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। अनेकों खेतों में गन्ना बंधाई तथा फसल में रोग कीट का आपतन नाम मात्र ही पाया गया। कृषकों को खेतों में गन्ना बंधाई करने की सलाह दी गई। भ्रमण के दौरान ओ डी शर्मा, सहायक महाप्रबंधक गन्ना, शिवांशु शुक्ला, बिजेंद्र सिंह, उप प्रबंधक गन्ना तथा सतनाम सिंह, वरिष्ठ अधिकारी गन्ना भी मौजूद रहे।

चीनी मिल पलिया ने ग्राम देवीपुर में प्रगतिशील किसान के प्लांट में जाकर अच्छे उत्पादन और लोगों से निराकरण की दी जानकारी

(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

‎पलिया कलां (खीरी ) बजाज हिन्दुस्थान शुगर लिमिटेड चीनी मिल पलिया मिल गेट के ग्राम देवीपुर में किसानों ने प्रगतिशील किसान राजवंत सिंह राजू के खेत पर कोलख-14201 गन्ना प्रजाति के प्लांट को देखा चीनी मिल की तरफ से प्रवीण सिंह यशवंत सिंह, कमलकृत, सचिव गन्ना समिति पलिया प्लॉट पर मौजूद रहे l किसानों को बताया गया कि गन्ने की किस्म कोलख-14201 अधिक वजन देने वाली प्रजाति है और निरोगी है शरद ऋत सितंबर से नवंबर में बोने के लिए सर्वोत्तम है. किसान भाई इसकी बुआई के समय इसकी दूरी 4 फीट पर लागाये और भूमि का ट्राइकोडर्मा से उपचार करें. एनपीके कंसोर्टिया, माइकोराइजा, और किटनासक सेरासागी का बुवाई के समय उपयोग अवश्य करे , इससे गन्ने में बीमारी नहीं लगता तथा उत्पादन भी अच्छा निकलता है।

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