पलियाकलां (खीरी) 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा कार्यालयीय कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों एवं कार्मिकों को प्रशस्ति-पत्र एवं नकद धनराशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में संदीप कुमार, वन रक्षक; हरी प्रसाद, महावत; सानू एवं सलावत, दैनिक चाराकटर; गोधू, न्यूनतम वेतनकर्मी; आफताब, वायरलेस ऑपरेटर; वीरेन्द्र प्रताप सिंह यादव, वन्यजीव रक्षक; रामफूल यादव, वन दरोगा; मुल्हे, दैनिक श्रमिक; कन्हैया लाल मिश्रा, वन्यजीव रक्षक; श्रीमती नन्ही देवी, दैनिक श्रमिक; सोबरन लाल, न्यूनतम वेतनकर्मी; आकाश कनौजिया, वाहन चालक/न्यूनतम वेतनकर्मी; अरविंद कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर/न्यूनतम वेतनकर्मी; सुश्री गरिमा, वन दरोगा; शिवम, स्वच्छक; श्रीमती सुनीता देवी, खल्लासी एवं रितेश पटेल, क्षेत्रीय वन अधिकारी, दुधवा रेंज को उनके उत्कृष्ट कार्य एवं वन एवं वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जगदीश आर., उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को प्रशस्ति-पत्र एवं नकद धनराशि प्रदान की गई। उन्होंने कार्मिकों के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा एवं वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति उनके योगदान की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी उत्साह एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बेलरायां रेंज में भी वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए शरीफ अहमद, वन दरोगा को डॉ. एच. राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर-खीरी द्वारा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।इसी क्रम में दुधवा रेंज में कार्यरत गौरव यादव, वन्यजीव रक्षक को वन एवं वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में महावीर सिंह, वन्यजीव प्रतिपालक, दुधवा एवं किशनपुर; दीपक कुमार पाण्डेय, उप प्रभागीय वनाधिकारी, बेलरायां, मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी, एसटीपीएफ स्टाफ तथा कार्मिकों के परिवारजन उपस्थित रहे।दुधवा टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किए जाने को उनके मनोबल को बढ़ाने तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण एवं जिम्मेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।