(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी)लखनऊ: लखनऊ स्थित पारिजात कक्ष में उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, डॉ. अरुण कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन की शासी निकाय की 06वीं बैठक का सफल आयोजन संपन्न हुआ। इस बैठक में पर्यटकों, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के कल्याण के दृष्टिकोण से कई ऐतिहासिक एवं महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए।बैठक के दौरान राज्यभर के प्रकृति प्रेमियों को बड़ी राहत देते हुए यह स्पष्ट घोषणा की गई कि दुधवा टाइगर रिजर्व में सफारी एवं प्रवेश दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप पर्यटन से प्राप्त राजस्व वित्तीय वर्ष 2024-25 के ₹2.15 करोड़ से 49 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज करते हुए वर्ष 2025-26 में ₹3.20 करोड़ पहुँच गया है।
पर्यटन सुविधाओं के आधुनिक एवं पारदर्शी विस्तार के लिए प्रदेश भर के सभी वन्यजीव क्षेत्रों, जिनमें टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्य और प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) शामिल हैं, में सफारी तथा आवास (रूम्स) की ऑनलाइन बुकिंग हेतु एक एकीकृत पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, मुख्य वन क्षेत्रों पर दबाव कम तथा स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए “बफर में सफर” योजना की शुरुआत की जा रही है, जिसके अंतर्गत बफर क्षेत्र में संचालन हेतु पंजीकृत वाहनों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इसी अवसर पर वन्यजीव संरक्षण और समुदाय-आधारित पहलों से जुड़े दो विशेष आकर्षण भी लॉन्च किए गए। दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों की स्थिति और उनकी निगरानी से जुड़ी पुस्तक ‘Status and monitoring of The Greater One-Horned Rhinoceros in Dudhwa National Park’ (राइनो आईडी पुस्तिका) का विमोचन किया गया। इसके साथ ही, भरथपुर गांव के विस्थापन और पुनर्वास पर आधारित एक लघु फिल्म (शॉर्ट फिल्म) के ट्रेलर का भी लोकार्पण किया गया, जो इस अनूठी पहल को प्रदर्शित करता है।
जनसमस्याओं और प्राकृतिक चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, पलिया क्षेत्र के माननीय विधायक रोमी साहनी द्वारा सुहेली नदी में जमा गाद (सिल्ट) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इस पर उन्हें आश्वस्त किया गया कि सुहेली नदी के अध्ययन एवं प्राकलन हेतु आवश्यक बजट शीघ्र ही स्वीकृत कर जारी किया जाएगा और जल्द ही नदी की सफाई का कार्य प्रारंभ होगा।
माननीय मंत्री जी ने बैठक को संबोधित करते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए जो भी आवश्यक संसाधन और तकनीक चाहिए, वे प्राथमिकता पर उपलब्ध कराए जाएंगे, परंतु विभाग को हर हाल में संघर्ष की घटनाओं में कमी लानी होगी। इसी क्रम में यह संवेदनशील निर्णय भी लिया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित परिवारों को फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सहायता प्रदान कर उनके पुनर्वास एवं बेहतरी के ठोस प्रयास किए जाएंगे।
इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से माननीय राज्यमंत्री के. पी. मलिक, पलिया विधायक रोमी साहनी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष (HoFF) सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीमती अनुराधा वैमुरी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव श्रीमती बी. चंद्रकला, उत्तर प्रदेश वन निगम के महाप्रबंधक सुजॉय बनर्जी, फील्ड निदेशक (दुधवा टाइगर रिजर्व) तथा दुधवा टाइगर रिजर्व के तीनों प्रभागों के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) एवं उप-निदेशक (DD) उपस्थित रहे।
Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *