पलिया कलां (खीरी)लखीमपुर खीरी, 09 सितंबर। जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है। घटनाओं की रोकथाम को लेकर बुधवार शाम को हुई उच्चस्तरीय बैठक में वन क्षेत्र से सटे गांवों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी, ग्रामीण जागरूकता और विभागीय समन्वय को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में केवल घटनाओं की समीक्षा तक सीमित रहने के बजाय उनके पीछे के कारणों और भविष्य में रोकथाम के ठोस उपायों पर गहन मंथन हुआ।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम अंजनी कुमार सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने में किसी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। जिन क्षेत्रों में पूर्व में घटनाएं हुई हैं अथवा वन्यजीवों की गतिविधियां अधिक हैं, उन्हें विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए सतर्कता, निगरानी और जनजागरूकता का मजबूत तंत्र विकसित किया जाए। कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। वन विभाग और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से ऐसी कार्ययोजना तैयार करें, जिसका असर सीधे गांव और खेत तक दिखाई दे। सूचना मिलने पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के साथ ही ग्रामीणों को पहले से सावधान करना भी प्राथमिकता में रखा जाए।
*डीएफओ ने आंकड़ों के साथ पेश की स्थिति*
बैठक में डीएफओ तापस मिहिर और कीर्ति चौधरी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति, वर्षवार आंकड़ों और रोकथाम के लिए वन विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की निगरानी, गश्त और जागरूकता गतिविधियों की जानकारी साझा की। डीएफओ ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पहले घटनाएं हो चुकी हैं, वहां अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामीणों को वन्यजीवों की गतिविधियों और सुरक्षा उपायों के प्रति लगातार जागरूक किया जाना जरूरी है।
*जंगल की सीमा से गांव तक बनेगी सुरक्षा की ‘चेन’*
बैठक में वन क्षेत्र से लगे गांवों को लेकर विशेष रणनीति पर जोर दिया गया। वन क्षेत्र के आसपास के खेतों में इंटरक्रॉपिंग फसलों को बढ़ावा देने, ग्रामीणों को खेती के दौरान सामूहिक रूप से कार्य करने तथा संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया गया। डीएम ने निर्देश दिए कि ग्राम चौपालों को जागरूकता का प्रभावी मंच बनाया जाए। चौपालों में वन विभाग के अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित कर ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के व्यवहारिक उपाय बताए जाएं।
*अकेले नहीं, समूह में जाएं खेत*
ग्रामीणों को संदेश देने के निर्देश दिए गए कि जंगल से सटे खेतों में अकेले न जाएं, बल्कि समूह में ही जाएं। घर से निकलते समय गले में गमछा बांधकर रखने तथा मोबाइल पर तेज आवाज में गाना बजाने की सलाह दी जाए, जिससे आसपास मौजूद वन्यजीवों को मानव गतिविधि का संकेत मिल सके। रात्रि के समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों को घर के बाहर खुले में न सोने तथा पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। पशुपालन विभाग को भी ग्रामीणों को पशुओं की सुरक्षा के संबंध में आवश्यक जानकारी देने के निर्देश दिए गए।
बैठक का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय घटना से पहले खतरे की पहचान और उसकी रोकथाम की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, ग्रामीणों तक त्वरित सूचना, विभागीय समन्वय और लगातार जागरूकता के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में काम किया जाएगा।
*अंधेरे में नहीं होगा वन्यजीवों का खतरा, लगेंगी सोलर लाइट*
वन क्षेत्र से सटे गांवों में पथ प्रकाश व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील स्थानों पर सोलर लाइट लगवाने पर भी चर्चा हुई। सीडीओ अभिषेक कुमार ने ऐसे स्थानों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई, ताकि रात में ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
*सभी विभागों ने दिए सुझाव, समन्वित रणनीति पर जोर*
बैठक में सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता, डब्लूडब्लूएफ के प्रतिनिधियों, जिला गन्ना अधिकारी और डीपीआरओ समेत संबंधित अधिकारियों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अधिकारियों ने विभागीय समन्वय, ग्रामीण जागरूकता, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपायों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।