पलिया कलां, (खीरी) वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर चल रहे ‘नमामि भारतम् ‘
वन्देमातरम सामूहिक गायन अभियान के अंतर्गत आज दिनांक 25 सितम्बर 2026 को प्रातः 11:00 बजे सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, पलिया कलां के प्रांगण में सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन किया गया।
विद्यालय प्रांगण में एक साथ, एक लय, एक स्वर में लगभग 1700 लोगों ने सहभागिता कर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। इस अवसर पर विद्यालय के भैया-बहन, आचार्य परिवार, विद्वत परिषद, पूर्व छात्र, मातृ भारती, अभिभावक एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विद्या मंदिर पलिया के माध्यम से नगर एवं पोषित ग्रामों के 40 विद्यालयों में कुल 21,600 कंठों ने एक साथ वंदे मातरम् का गायन किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आदरणीय रमन सिंह (खंड शिक्षा अधिकारी) ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि 150 वर्षों की भारत की संघर्ष यात्रा और करोड़ों भारतीयों के त्याग और बलिदान का मूल मंत्र है। इसके वास्तविक भाव को समझने के लिए बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय कृत ‘आनंदमठ’ उपन्यास का पठन अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यही वह अमर राष्ट्रगीत है जिसे स्वतंत्रता की अर्धरात्रि 14-15 अगस्त 1947 को सुचेता कृपलानी ने संविधान सभा में गाया था और 15 अगस्त की प्रातः आकाशवाणी से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने इसका गायन किया था। पंडित जी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को पत्र लिखकर पूरा वंदे मातरम् गाने का आग्रह किया था, जो उनके सिद्धांतों के प्रति दृढ़ता का प्रतीक है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय सलिल अग्रवाल (पलिया नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी) ने कहा कि वंदे मातरम् की अंतिम पंक्तियों कोटि -कोटि कंठ कल-कल निनाद कराले…’ से ‘नमामि त्वाम्’ तक में भारत माता की बाहुबल धारिणी शक्ति और वात्सल्य स्वरूप का अद्भुत वर्णन है, जहाँ संतान अपनी माता को एकमात्र अद्वितीय शक्ति के रूप में नमन करती है।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव के भाव को जागृत करना रहा। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रहा।