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(रचयिता – श्रीमती कोमल सिंह)

प्रदूषण ही प्रदूषण, चारो और फैलाया है, क्या वायु में, क्या जल-थल में, कैसा शोर मचाया है।
माता कहते हो, जिन नदियों को, तुमने उनको भी नर्क बनाया है,
पड़ोसी देशो से कुछ सीखो उनकी नदियाँ जाकर देखो, उन देशो में, कैसी हरियाली छाए तालाब, मेदिनी और सड़‌को को तुमने कूड़ाघर बनाया है। काट-काट कर इस प्रकृति को नभचर मार भगाए हैं। करके नष्ट इन अरण्यों को अपने आलय बनाए हैं। कर्णभेदक ध्वनि से बहरापन और तनाव वाहन, कारखानों और लाउडस्पीकर ने बहुत के प्लास्टिक के उपयोग ने, मृदा दूषित कर और तूने करके बेघर इन जीवों को अपने घर बसाये हैं।
कारखानों और वाहनों ने, इतना प्रदूषण आसमान का रंग या नीला, व्योम कालो बनाय प्रदूषण ही प्रदूषण चारो ओर फैलाया।
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