(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी)लखीमपुर खीरी, 30 मई। स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों और चर्चाओं के बीच लखीमपुर खीरी में मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार ने पारदर्शिता और सुशासन की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा विकास भवन से लेकर गांवों तक हो रही है। शासन की स्थानांतरण नीति का अक्षरशः पालन करते हुए सीडीओ ने कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार तैनाती देकर व्यवस्था में भरोसे का नया अध्याय जोड़ा है।

ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत सबसे वरिष्ठ कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया इस बार पूरी तरह खुली और पारदर्शी रही। विकास भवन में आयोजित प्रक्रिया के दौरान सीडीओ अभिषेक कुमार ने स्वयं कर्मचारियों के सामने विभिन्न ब्लॉकों की रिक्तियां प्रदर्शित कराईं और फिर उनकी वरीयता के आधार पर तैनाती सुनिश्चित की।

पंचायती राज विभाग में 114 ग्राम पंचायत अधिकारियों के सापेक्ष स्थानांतरण योग्य 11 कर्मचारियों तथा ग्राम विकास विभाग में 102 ग्राम विकास अधिकारियों के सापेक्ष 10 कर्मचारियों को उनकी इच्छा के अनुरूप नए कार्यक्षेत्र आवंटित किए गए। इतना ही नहीं, चयन प्रक्रिया पूरी होते ही मौके पर स्थानांतरण आदेश भी सौंप दिए गए।

*पहले एजुकेटर भर्ती, अब ट्रांसफर में भी पारदर्शिता*
सीडीओ अभिषेक कुमार का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले 120 एजुकेटर पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी उन्होंने पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया था। पहले दिन परीक्षा, परिणाम और मेरिट घोषित की। वही डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन, विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी कराकर अभ्यर्थियों की पसंद के अनुरूप स्कूल आवंटित किए गए थे। उसी दिन नियुक्ति पत्र भी वितरित कर दिए गए थे।

*प्रशासनिक कार्यशैली बनी चर्चा का विषय*
कम समय में तेज निर्णय, नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन और हर प्रक्रिया को खुला एवं पारदर्शी बनाने की कार्यशैली ने सीडीओ अभिषेक कुमार को अलग पहचान दी है। ट्रांसफर प्रक्रिया के इस मॉडल ने न केवल कर्मचारियों का भरोसा बढ़ाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि प्रशासनिक निर्णय निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ लिए जाएं तो विवादों की संभावना स्वतः समाप्त हो जाती है।

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