(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी नित्य प्रतिदिन वन्य जीव विशेषज्ञों एवं वन्य जीवन में रुचिकर लोगों की जिज्ञासा तृप्ति का एक सर्वोत्तम श्रोत बनता जा रहा है। यहां निरंतर वन्य जीवन को और बेहतर बनाए जाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की परिणति निरंतर वन्य जीवन की वंशवृद्धि के रुप में हो रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व अपने आंचल में अथाह जैवविविधता की धरोहर संजोए हुए है। यहां आज कुछ नया मिलता है, तो अगले दिन कुछ और यह सिलसिला ऐसा है कि थमने का नाम ही नही ले रहा है। इसी का परिणाम है कि नित्य प्रतिदिन वन्य जीवन से जुड़े विशेषज्ञ, शोधार्थी पर्यटक निरंतर इसकी ओर आकृष्ट हो रहे हैं।
वन्य जीव के इस अथाह सागर रुपी दुधवा वन में अब तक विविध नवीन जैव विविधता सामने आने का परिणाम यह रहा है कि अब न केवल विशेषज्ञ, शोधार्थी, पर्यटक, अपितु यहां कार्य कर रहे अधिकारी एवं कर्मचारी भी इस अनंत जैव विविधता पर सूक्ष्म दृष्टि बनाए रखते हैं, जैसे ही कुछ नवीन लगता है, उसकी जानकारी प्रारंभ कर दी जाती है। इसी कड़ी में दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के दुधवा बाघ संरक्षण फाउण्डेशन के अंर्तगत कार्यरत सुश्री नाजरुन निशा को बेलरायां रेंज में ग्रासलैण्ड में रहने वाली बर्डस का सर्वे किए जाने के उपरांत वापस आते समय एक अद्भुत सर्प दिखाई दिया। सर्प जीवन में खासी रुचि रखने वाली नाजरुन द्वारा उसका वीडिया एवं फोटो सुरक्षित करने के बाद वापस आकर उसका अध्ययन किया तो पाया कि यह सर्प कामन ब्रांजबैक ट्री स्नैक है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि युवा कार्मिक नाजरुन निशा जो दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के दुधवा बाघ संरक्षण फाउण्डेशन के अंर्तगत मोटीवेटर के रुप में कार्यरत है। यद्यपि उसका कार्य लोगों को वन एवं वन्य जीवों के प्रति संवेदनशीलता, उनकी सुरक्षा, एवं आकस्मिक स्थितियों में अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों को विविध कार्यशाला, संगोष्ठी आदि के माध्यम से आम जनमानस में पहुॅचाना है। उक्त कार्य के साथ-साथ उसको वन्य जीवों को रेस्क्यू करने में खासी रुचि है। उसके द्वारा अब तक मगर, मानीटर लिजर्ड, जंगल कैट एवं विशेषकर सर्पों को रेस्क्यू किया गया। इसलिए उसकी रुचि सर्पों की जानकारी रखने एवं इस विषय में जिज्ञासा बढ़ना एक सामान्य बात है। उसके द्वारा कई अन्य महत्वपूर्ण आपरेशन में भी अपनी ड्यूटी का निर्वहन किया गया है।
कामन ब्रांजबैक ट्री स्नेक का पतला शरीर, भूरा-तांबे जैसा रंग और पेड़ों पर रहने की इसकी आदत (तइवतमंस इमींअपवत) ध्यान आकर्षित करने वाली है। पेड़ों के बीच इसकी तेज़ी से चलने की क्षमता और अपने वातावरण में आसानी से घुल-मिल जाने की विशेषता इसे एक बेहद अनुकूलनशील (कंचजपअम) और छिपी रहने वाली प्रजाति बनाती है।
ब्राउन ब्रॉन्ज ट्री स्नेक सामान्यतः आक्रामक नहीं होता और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह छिपकलियों और छोटे कीटों की संख्या को नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसकी उपस्थिति एक स्वस्थ वन पारिस्थितिकी का संकेत मानी जाती है। नाजरुन द्वारा इस खोज को भविष्य के लिए प्रेरणादायी एवं उत्प्रेरक बताया है साथ ही शिक्षा एवं अनुसंधन क्षेत्र में भी एक आंशिक योगदान बताकर प्रसन्नता व्यक्त की है।
इस विषय में दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के जगदीश आर. उपनिदेशक, दुधवा टागर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी द्वारा प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव विविधता के संरक्षण में किए जा रहे बेहतर प्रयासों का परिणाम बताया है। साथ ही इस दिशा में अपनी रुचि बढ़ा रहे अधिकारी/कर्मचारियों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसी खोज के लिए निरंतर वन्य जीवन पर सूक्ष्म दृष्टि बनाए रखने की आवश्यकता होती है, जो कर्मचारियों में देखकर अच्छा प्रतीत होता है।
इस विषय में दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के डॉ0 एच0 राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर-खीरी द्वारा अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा पेट्रोलिंग एवं राजकीय कार्यों के दौरान जैव विविधता पर रखी जा रही बारीक नजर को वन्य जीव संरक्षण क्षेत्र के अभिलेखीकरण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय प्रयास बताया है।

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