(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलियाकलां- खीरी विद्या भारती विद्यालय स्वदेश सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज महराजगञ्ज में आज अनन्त चतुर्दशी का महात्म्य विद्यालय की प्रातः कालीन वन्दना सभा में बताया गया। भैया बहनों को सम्बोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य वीरेन्द्र वर्मा ने बताया कि हमारी सनातन परम्परा में प्रत्येक दिन एक उत्सव की भाँति ही है। वर्ष के 365 दिनों में 400 से अधिक उत्सव होते हैं। प्रत्येक दिन ही भगवान के द्वारा दिया एक अनुपम उपहार है । अतः प्रत्येक दिवस हमें एक त्यौहार की भांति ही मनाना चाहिए। प्रातः से रात्रि तक की दिनचर्या व्यवस्थित, सटीक और आत्म संयमित होनी चाहिए। प्रतिपल का सदुपयोग हम श्रेष्ठ कार्य के लिए करें .. ऐसा अपना संकल्प बने। आज विशेष त्यौहार अनन्त चतुर्दशी का है आज के दिन गणेश चतुर्थी को प्रतिष्ठित की गई गणेश प्रतिमा का विधि विधान से दस दिवस तक पूजन करके उसका विसर्जन करते हैं। आज के दिन विशेष रूप से भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना करते हैं। ओम् नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना अच्छा माना जाता है यह शुभ लाभकारी एवंं श्रेष्ठ फलदाई होता है।
अनन्त सूत्र को भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखकर गंगाजल, अष्टगंध, अक्षत, फूल, धूप, दीप से जाप करें. ये अनन्त सूत्र विष्णु जी के चौदह लोकों का प्रतीक है. अनन्त सूत्र की पूजा करते समय ॐ अनन्ताय नमः का जाप करें. चौदह बार अभिमन्त्रित गाँठ लगाएं। अब फल, खीर का भोग लगाएं और फिर इसे पुरुष दाएं हाथ और महिलाएं बाएं हाथ की बांह में धारण करें। कहा जाता है कि ऐसा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। हमारी मानसिक चेतना के सकारात्मकता से परिपूर्ण होने पर ही यह सब सम्भव होता है अतः श्रेष्ठ कार्यों का संकल्प नित्य करें ।

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