



(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) लखीमपुर खीरी, 27 अगस्त। राजकीय इंटर कॉलेज में गुरुवार को छात्र-छात्राओं के साथ संवाद कार्यक्रम में डीएम अंजनी कुमार सिंह ने बच्चों को पढ़ाई के साथ जीवन में आगे बढ़ने के गुर बताए। उन्होंने मंच पर बोलने के डर, पढ़ाई में एकाग्रता और सवालों के गलत उत्तर आने पर तनाव जैसे विद्यार्थियों के सवालों का सहज अंदाज में जवाब दिया। डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र व प्रधानाचार्य डॉ. जगत प्रकाश सिंह की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलन व मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
डीएम ने कहा कि संवाद कभी एकतरफा नहीं हो सकता। बच्चे जब तक सवाल नहीं पूछेंगे, तब तक संवाद और शिक्षा दोनों अधूरे रहेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मन में चल रहे सवाल, समस्याएं और भविष्य के सपने बिना झिझक साझा करें।
*मंच पर डर लगता है तो बार-बार बोलें*
एक छात्र ने मंच पर आकर बोलने में डर लगने की समस्या बताई। डीएम ने कहा कि यह स्थिति केवल बच्चों के साथ नहीं होती, बल्कि बड़े लोगों को भी कभी-कभी इसका सामना करना पड़ता है। जब हम सामने वाले को खुद से बहुत बड़ा मान लेते हैं तो झिझक पैदा होती है। इसका सबसे बेहतर इलाज अभ्यास है। लगातार बोलने और प्रयास करने से डर अपने आप खत्म हो जाता है।
*लक्ष्य तय करो, विकल्पों में मत उलझो*
पढ़ाई के समय फोकस न बन पाने के सवाल पर डीएम ने कहा कि मन में कई विकल्प चलने लगें तो एकाग्रता टूट जाती है। कभी लगता है पढ़कर क्या होगा, कभी दोस्त खेलते नजर आते हैं तो कभी किसी दूसरे काम का ख्याल आने लगता है। ऐसे में सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि 90 प्रतिशत से अधिक अंक, जेईई या नीट जैसे लक्ष्य निर्धारित करें और फिर शॉर्टकट की तलाश छोड़ दें। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। कठिन विषय से भागने के बजाय बार-बार उसका अभ्यास करें। लगातार प्रयास से कठिन अवधारणा भी धीरे-धीरे आसान हो जाती है।
*गलत उत्तर को देखकर घबराएं नहीं, गलती खोजने की जिद करें*
एक छात्र ने सवाल किया कि जल्दबाजी में सवाल हल करते समय कुछ स्टेप छूट जाते हैं। तरीका सही होने के बावजूद उत्तर गलत आने पर तनाव होने लगता है। इस पर डीएम ने कहा कि गलत उत्तर पर तनाव नहीं, गलती पकड़ने की जिद पैदा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर गलत आने के बाद यह सोचें कि गलती हुई कहां। जब तक सही उत्तर न मिल जाए, सवाल को दोबारा हल करते रहें। जरूरत पड़े तो एक ही सवाल 10 बार हल करें, लेकिन यह पता लगाए बिना आगे न बढ़ें कि गलती क्यों हुई।
डीएम ने बताया कि स्टेप छोड़ने के दो कारण हो सकते हैं। अभ्यास के कारण कुछ स्टेप दिमाग में ही हल हो जाना दक्षता का संकेत है। लेकिन यदि अगले स्टेप का तरीका ही मालूम नहीं है और जल्दबाजी में उसे छोड़ दिया गया है तो इसका मतलब है कि सवाल अभी पूरी तरह समझ में नहीं आया।
*सवाल समझ लिया तो आधा हल हो गया*
डीएम ने कहा कि सवाल को अच्छी तरह समझ लेना ही आधा हल कर लेना है। परीक्षा में प्रश्न पहली बार में समझ न आए तो उसे दो-तीन बार पढ़ें। कई बार विद्यार्थी से पूछा कुछ जाता है और वह जवाब कुछ और लिख देता है। इसलिए उत्तर लिखने से पहले प्रश्न को ठीक से समझना जरूरी है। कैलकुलेशन की छोटी गलतियों को लेकर उन्होंने कहा कि अभ्यास ही इसका समाधान है। पहाड़े इसलिए बचपन से याद कराए जाते हैं, ताकि गणना में समय न लगे। नियमित अभ्यास से गति के साथ सटीकता भी बढ़ती है।
*संघर्ष का मैदान छोड़कर मत आना*
डीएम ने कहा कि सवाल समझ में न आए तो शिक्षक से पूछें। जरूरत हो तो उपलब्ध अन्य माध्यमों की भी मदद लें, लेकिन प्रयास बंद न करें। उन्होंने बच्चों से कहा कि “संघर्ष का मैदान छोड़कर मत आओ। कुछ किए बिना ही जय-जयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की जीत होती है।” कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने खुलकर सवाल पूछे। डीएम ने उनके सवालों का जवाब देते हुए उन्हें लक्ष्य के प्रति समर्पण, नियमित अभ्यास और असफलता से सीखने की प्रेरणा दी।
