(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) दुधवा नेशनल पार्क में सर्दियां आने होते ही दूर-दूर से प्रवासी पक्षी आना शुरू हो जाते हैं भारत में बहुत सारे पक्षी उत्तरी एशिया यूरोप साइबेरिया और टुंड्रा के क्षेत्रों से भी आ जाते हैं। साइबेरियन क्रेन को स्नो केन के रूप में भी जाना जाता है यह प्रवासी पक्षी दुधवा के जलाशयों में कुछ महीने अपना डेरा डाल देते हैं बाद में गर्मी के शुरू में ही चले जाते हैं यह पक्षी शीत में ठंडे देशों में अत्यधिक शीत के कारण वहां से चले आते हैं वहां पर सब कुछ बर्फ में जम जाता है भोजन और पानी बहा न मिलने के कारण यह पक्षी अपनी जीविका के लिए प्रवास करते हैं अधिकांश पक्षी दिसंबर जनवरी में आते हैं तथा फरवरी में सर्दी कम होने बाद वापस चले जाते हैं। यह पक्षी साइबेरिया एवं यूरोपीय ठंडी देश से आते हैं आने वाले पक्षियों में सुरखाब, ग्रेलैग्र गूंज ,चैता वीजन, नीलसर, मलार्ड, छोटा लालासर ,कामनपोचर्ड़ है तथा दुर्लभ पक्षी बंगाल फ्लोरिकल भी आ जाते हैं वैसे अन्य
पक्षी भी हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर के दुधवा नेशनल पार्क के जलाशयों में आ जाते हैं।

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