(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी)दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी में गैण्डों की गणना “टोटल हेड काउंट मेथड” से हुई ।गणना का कार्य पूर्ण हो गया। अब बच्चों सहित गैण्डों की संख्या 53 हो गई है। पूरे भारत वर्ष में उत्तर प्रदेश राज्य (दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी) को छोड़कर मात्र दो ही राज्यों में गैण्डों की उपलब्धता है। उनमें से एक है असम दूसरा पश्चिम बंगाल। यह हमारे प्रदेश, जिला और क्षेत्र के लिए गौरव की बात है कि यहां बाघ, हांथी, भालू जैसे बड़े चौपायों के साथ एक और बड़ा चौपाया गैण्डे के लिए विख्यात है।वर्ष 1984 में असम एवं नेपाल राष्ट्र से लाए गए 07 गैण्डों से प्रारंभ हुई गैण्डों के पुर्नवास की गाथा में सर्वप्रथम दक्षिण सोनारीपुर रेंज के ककरहा प्रक्षेत्र में प्रथम गैण्डा पुर्नवास केन्द्र स्थापना वर्ष में स्थापित किया गया। इसके उपरांत अप्रैल 2018 में बेलरायां रेंज के भादी क्षेत्र में दूसरा गैण्डा पुर्नवास केन्द्र स्थापित करते हुए 04 गैण्डा (कल्पना, रोहिनी, हिमांगिनी और नेपोलियन) अवमुक्त किए गए। इसके उपरांत उस समय दुधवा पर्यटन में एक और आयाम स्थापित करते हुए नवंबर 2024 में 02 (विजय श्री एवं दीपिका), मार्च 2025 में 02 (नकुल और रिद्धि) तथा मार्च 2026 में 04 (हर्ष, दीप्ति, सुषमा और राशि) गैण्डा स्वछंद विचरण हेतु अवमुक्त किए गए। जिससे पर्यटकों को गैण्डा पुर्नवास केन्द्र से बाहर ही पर्यटन क्षेत्र में गैण्डों का दीदार सुलभ हो सका।
दुधवा टाइगर रिजर्व में गैण्डों की यह गणना चौथी बार कराई गई। विगत वर्ष जहां गैण्डों की संख्या 51 थी। वहीं इस बार आपसी द्वंद एवं हिंसक वन्य जीव से हुए द्वंद के चलते हिमांशु एवं कल्पना का बच्चा (नर गैण्डे द्वितीय गैण्डा पुर्नवास केन्द्र) एवं राजेश्वरी (मादा गैण्डा प्रथम गैण्डा पुर्नवास केन्द्र) के आकस्मिक निधन के बावजूद दिनांक 25 से 27 जून तक आयोजित की गई गैण्डा गणना में गैण्डों की संख्या में 05 की वृद्धि अंकित हुई है। वर्तमान में दुधवा में 17 नर, 25 मादा, अव्यस्क एवं बच्चे 11 सहित कुल 53 गैण्डा उपलब्ध हैं। इस वर्ष हुई गैण्डा गणना में स्वछंद रुप से विचरण कर रहे 08 गैण्डे भी सम्मिलित हैं। यह जानकारी दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक जगदीश आर. ने दी।
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