

(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) लखीमपुर खीरी 02 नवम्बर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं मंत्री संस्कृति एवं पर्यटन जयवीर सिंह की प्रेरणा व मार्गदर्शन में तथा उप्र संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो.जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक राज कुमार की कुशल परिकल्पना एवं संयोजन में संस्कृति विभाग के उप्र संगीत नाटक अकादमी, संस्कृति विभाग लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश के प्राचीन कलाकारों की स्मृति में घराना संगीत समारोह का आयोजन, एक नवम्बर को लखीमपुर खीरी के ग्राम खमरिया खुर्द तहसील धौरहरा स्थित लोकप्रिय सैदापुर फार्म परिसर में भव्य रूप से किया गया। इसमें लखनऊ के वरिष्ठ गायक किशोर चतुर्वेदी और मुम्बई की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगना नेहा सिंह मिश्रा एवं बाराबंकी के लोकप्रिय तबला वादक अनिल मिश्रा महाराज ने प्रभावी वाद्य-वृंद की प्रस्तुतियां दी। इस भव्य समारोह में मेहमान के रूप में उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) उप्र संगीत नाटक अकादमी , संस्कृति विभाग श्रीमती विभा सिंह, कुंवर रुद्र प्रताप सिंह, स्वामी जी, ज्ञानेंद्र सक्सेना, महामंत्री, राजेश श्रीवास्तव, सहमंत्री, अंकित रस्तोगी, कोषाध्यक्ष, आनंद अग्निहोत्री, संगीत विधा प्रमुख, सजल साहू संस्कार मित्र एवं सह कलाकार, संस्कार भारती लखीमपुर खीरी, अभिषेक विभाग प्रचारक आदि ने नृत्य गायन एवं वादन की संगीतमय त्रिवेणी का आनंद लिया।
वरिष्ठ गायक किशोर चतुर्वेदी ने परंपरानुसार प्रथम देव गणेश की स्तुति प्रस्तुत की। इस क्रम में उन्होंने “हेरी सखी मंगल गावो री” सुनाकर प्रशंसा हासिल की। इसमें प्रियतम स्वरूपी परमात्मा के आत्मा से मिलन का सुंदर वर्णन सुनने को मिला। इस क्रम में उन्होंने प्रसिद्ध सूफी संत और कवि अमीर खुसरो द्वारा लिखी और संगीतबद्ध किया गया लोकप्रिय सूफी कलाम “छाप तिलक सब छीनी” सुनाकर सबका हृदय जीत लिया। 14वीं शताब्दी की इस ब्रज रचना का आगंतुकों ने झूमते हुए आनन्द लिया।
इस क्रम में बाराबंकी के लोकप्रिय तबला वादक अनिल मिश्रा ने प्रभावी वाद्य-वृंद की प्रस्तुतियां और मुम्बई की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगना नेहा सिंह मिश्रा के पारंपरिक कथक के अंतर्गत आमद, चक्करदार परन, फुटवर्क एवं प्रभावी हस्तसंचालन एवं भावों का दर्शकों ने तालियां बजाकर प्रशंसा की। नेहा सिंह मिश्रा लखनऊ घराने की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगना, कोरियोग्राफर एवं दूरदर्शन की बी-हाई ग्रेड कलाकार हैं। वे वाराणसी की 13 पीढ़ियों की समृद्ध संगीत परंपरा से जुड़ी हैं। वे सुप्रसिद्ध कथक गुरु स्वर्गीय पंडित अर्जुन मिश्र की पुत्रवधू और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथक कलाकार पंडित अनुज अर्जुन मिश्र की पत्नी एवं सह-कलाकार हैं। वे एंड टीवी के प्रसिद्ध रियलिटी शो ‘हाई फीवर-डांस का नया तेवर’ की फाइनलिस्ट रह चुकी हैं तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं। उन्होंने अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, रूस, इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, स्पेन सहित विश्व के अनेक देशों में कथक प्रस्तुतियाँ दी हैं। लखनऊ महोत्सव, ताज महोत्सव, कोणार्क महोत्सव एवं अनेक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सवों में उनकी प्रस्तुतियाँ सराही गई हैं। वर्तमान में वे अनुज अर्जुन मिश्र डांस कंपनी की कलात्मक निदेशिका एवं प्रमुख नृत्यांगना हैं और वंचित बच्चों को निःशुल्क कथक प्रशिक्षण देकर भारतीय शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। अनिल महराज की वाद्यवृंद प्रस्तुति में ऑक्टोपैड पर विश्वजीत, आर्गन पर हर्षित मिश्रा और नाल पर हर्षित शुक्ला ने प्रभावी वादन किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुनील शुक्ला एवं समरीन सिद्दीकी ने किया।
