(न्यूज़ -यू.पी. मिश्रा )

पलिया कलां(खीरी)वर्तमान परिस्थितियों में भारत सरकार अनेक भौतिक एवम् अभौतिक मुसीबतों का सामना कर रही है। कुछ लोगों का कहना है है कि इस मामले में सरकार पूरी तरह से सिर्फ़ दिखावा कर रही है। सरकार को चाहिए कि वो देश के हित में अच्छे, सुगठित, सुविचारित कानून बनाए जिसका बाईपास खोजना कठिन ही नहीं बल्कि असम्भव हो। इसी क्रम में मैं कहना चाहता हूं कि ये बात सरकार और सरकारी तंत्र बार बार दोहराते हैं कि देश में 5 करोड़ बांग्लादेशी घुस चुके हैं और आराम से राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार कार्ड बनवा लेते हैं और देश की चुनावी राजनीति, अर्थतंत्र , राशन, बिजली, पानी वितरण व्यवस्था, को प्रभावित करते हैं। देश की एकता, अमन चैन, शान्ति को भंग करते हैं। इसी को रोकने के लिए उपाय स्वरूप ये कहना है कि जब भारत सरकार ने राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार कार्ड बनाने के लिए निजी क्षेत्रों को लाइसेंस दिया था तभी इस बात का उल्लेख करना चाहिए था कि ऐसे किसी भी कागज़ात पर उसको जारी करने वाली संस्था का नाम भी होगा जिससे ये पता चल जाता कि किसी विशेष पेपर को किसने जारी किया और उसके सापेक्ष कौन कौन से पेपर लिए जो किसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के दस्तावेज जारी करने के लिए जरूरी होते। यदि ऐसा होता तो जितने विदेशी घुसपैठियों को आसानी से भारत में स्थान मिल जाता है वो असम्भव होता या कुछ कम होता। अभी भी समय है जितनी संस्थाएं ऐसे पेपर जारी करतीं हैं उनसे इस बात का हिसाब लिया जा सकता है कि उन्होंने अबतक कितने दस्तावेज जारी किए हैं।
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