(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी)लखीमपुर खीरी, 14 मई। जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए शासन के निर्देश पर प्रशासन ने अब प्राचीन पांडुलिपियों की खोज शुरू कर दी है। “राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” अभियान के तहत गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित अटल सभागार में डीएम अंजनी कुमार सिंह ने अधिकारियों, डिग्री कॉलेजों और संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्यों संग वर्चुअल बैठक कर अभियान को मिशन मोड में चलाने के निर्देश दिए।

डीएम ने कहा कि गांवों से लेकर नगर निकायों तक मंदिर, मठ, आश्रम, गुरुकुल, संस्कृत पाठशालाओं, पुस्तकालयों, संग्रहालयों और निजी संस्थानों में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान कर उनकी जानकारी जुटाई जाए। इससे जिले की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उसका डिजिटलीकरण भी संभव हो सकेगा।

बैठक में पांडुलिपि की परिभाषा समझाते हुए बताया गया कि यह हाथ से लिखी गई मूल रचना होती है, जो कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र या कपड़े पर तैयार की जाती थी। प्राचीन काल में ज्ञान, धर्म, साहित्य और विज्ञान के संरक्षण का यह प्रमुख माध्यम रही हैं।

सीडीओ अभिषेक कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वेक्षण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और अधिक से अधिक पांडुलिपियों का विवरण जुटाया जाए।
इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन द्वारा संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों के जानकार व्यक्तियों को सर्वेक्षणकर्ता नामित किया जा रहा है।

वहीं पीडी (डीआरडीए) एसएन चौरसिया ने आमजन से अपील की कि जिनके पास प्राचीन पांडुलिपियां हों, वे उनकी सूचना विकास भवन स्थित पर्यटन सूचना अधिकारी के दफ्तर अथवा उनके मोबाइल नंबर 9450631830 पर उपलब्ध कराएं। बैठक में डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र, पर्यटन सूचना अधिकारी संजय भंडारी, सभी अधिशासी अधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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