(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलियाकलां (खीरी ) जिला पंचायत बालिका इंटर कालेज में भारत के महान योद्धा, मेवाड सूर्य महाराणा संग्राम सिंह की 543वीं जयंती भव्यता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानाचार्य कृष्ण अवतार भाटी ने कहा कि राणा सांगा सनातनी संस्कृति के अद्भुत संवाहक थे। उन्होंने 1509 से 1528तक भारतमाता की अद्वितीय सेवा की थी। उन्होंने 1517के खतोली युद्ध में दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराया था। 1519में गागरोन युद्ध में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को बुरी तरह हराया था। उन्होंने 1527 में बयाना युद्ध में बाबर को भी धूल चटाई। राणा सांगा के एक हाथ, एक पैर, एक आँख नहीं थी, उसके बावजूद उन्होंने यवन आक्रमणकारियो का पुरे साहस के साथ मुकाबला किया था। उनका पराक्रम अतुलनीय था। जिन महान विभूतियों के कारण देश विश्व पटल पर जाना जाता है, उन्हें नमन करना हमारा परम् कर्तव्य है। लेकिन आजादी के 78साल बाद भी कुछ लोग ऐसे महान आत्माओं पर प्रश्न चिन्ह लगाते है। भारत के किसी भी इतिहासकार ने राणा सांगा के राष्ट्र के प्रति समर्पण पर संदेह नहीं किया है, फिर भी देश की सबसे बड़ी पंचायत राणा सांगा के अपमान की साक्षी बनी। यह देश के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। यदि देश में राणा सांगा, महाराणा प्रताप व शिवाजी जैसे योद्धा नहीं होते, तो इस देश का भूगोल व इतिहास कुछ और ही होता। ऐसे महान वीरों का अपमान देश का अपमान है। नोडल अधिकारी आकृति गुप्ता ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सभी देशों ने अपने यहां से गुलामी के चिन्हो को हटा दिया था। लेकिन अपने देश में आज भी गुलामी के चिन्हो व घटनाक्रमों को साक्ष्य बताकर राणा सांगा जैसे वीरों का अपमान किया जाता है। सक्षम व समृद्ध भारत के निर्माण के लिए हमें अपने गौरवशाली इतिहास का पुनरलेखन करना होगा। इस अवसर पर माया वर्मा, अर्चना शुक्ला, अतुल सिंह सहित समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

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