पलिया कलां (खीरी) सरस्वती शिशु /विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पलिया कलां खीरी में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मझगईं से स्थानांतरित होकर आये हुए प्रधानाचार्य सुनील सिंह का स्वागत सम्मान एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य राम प्रताप सिंह तथा वरिष्ठ आचार्य श प्रेम प्रकाश राणा की विदाई का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के श्री चरणों मे चंदन वंदन व पुष्पार्चन कर वन्दना से किया गया ।
विद्यालय के आचार्य रवीन्द्र कुमार मौर्य ने आए हुए सभी सम्मानित अतिथि महानुभावों का परिचय कराया गया । अतिथि महानुभावों में रवि गुप्ता ( समाजसेवी पलिया), विजय नारायण महेन्द्रा (प्रतिष्ठित व्यापारी पलिया) गिरीश चंद्र वर्मा (स्वर्ण व्यापारी ) ओम प्रकाश ‘सुमन’ (गुरुजी), अभिषेक शुक्ला (नगर कार्यवाह ), योगेंद्र (नगर प्रचारक ) संजीव जायसवाल जी एवं उनकी धर्मपत्नी, सुरेश गर्ग (व्यापारी ), विद्यालय के अध्यक्ष चाँद कुमार जैन प्रबंधक रामबचन तिवारी , सह प्रबंधक शिवपाल सिंह उपस्थित रहे सभी ने नवागत प्रधानाचार्य सुनील सिंह व गत प्रधानाचार्य राम प्रताप वरिष्ठ आचार्य प्रेम प्रकाश राणा तथा आचार्य से प्रधानाचार्य बने महामहेश शुक्ला को उपहार व वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आचार्य प्रबोधन श्रीमती बीटू , रवीन्द्र, पुष्पेंद्र के द्वारा किया गया ।
नवागत प्रधानाचार्य सुनील सिंह ने अपने विचार एवं आगामी सत्र से संबन्धित दिशा निर्देश देते हुए कहा कि आनंददायी कक्षा एक ऐसा शैक्षिक वातावरण है जहाँ पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मकता, खेल, और मानसिक प्रसन्नता को प्राथमिकता दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में सीखने की जिज्ञासा जगाना, तनावमुक्त माहौल प्रदान करना और उन्हें बेहतर नागरिक बनाना है, जिससे वे खेल-खेल में जटिल विषय भी आसानी से समझ सकें। इसी प्रकार से सभी आचार्य बंधु के द्वारा बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए भैया /बहनों की समस्याओं को समझ कर उसका समाधान किया तो निश्चित रूप से हमारे भैया /बहन अच्छे अंक प्राप्त सके गें ।
इसके पश्चात विद्यालय के
प्रधानाचार्य राम प्रताप सिंह सभी आचार्य बंधु/ आचार्या बहनों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है क्योंकि मेहनत और समर्पण ही जीवन के लक्ष्यों को पाने का एकमात्र साधन हैं। यह न केवल हमारे व्यक्तित्व को विकसित करता है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी बढ़ाता है। परिश्रम से ही किसी भी कठिन कार्य को संभव बनाया जा सकता है, जो सफलता के लिए अनिवार्य है।
प्रबंधक रामबचन तिवारी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि “तोहि देखि सीतलि भइ छाती, पुनि मो कहुँ सोइ दिनु सो राती॥
इसी के साथ उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य राम प्रताप सिंह को आर्शीवचन देते हुए कहा कि भगवान नारायण जी आपको अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करें मैं आपको कभी भी अपने हृदय से अलग नहीं कर पाऊंगा आप जहां भी रहेंगे सदैव हम सबको आप अपने साथ पाएंगे ।
आचार्य महामहेश शुक्ला जी विद्यालय में विताये गये अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुझे इस विद्यालय में जो प्रेम स्नेह मिला है उसका मै वर्णन नहीं कर सकता और मै सदैव याद रखूँगा।
विद्यालय के अध्यक्ष माननीय चाँद कुमार जैन जी कहा कि मैं भगवान महावीर स्वामी जी से प्रार्थना करता हूँ कि प्रधानाचार्य रामप्रताप जहां भी रहे वहां भगवान महावीर स्वामी जी उनको सुख,समृद्धि और शांति प्रदान करें इसी के साथ में नवागत प्रधानाचार्य का हमारे विद्यालय में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं ।और नई ऊर्जा के साथ विद्यालय के नए कीर्तिमान स्थापित करने मे सहयोग करें ।
इस अवसर समस्त आचार्य परिवार प्रबंध समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।