
(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी)दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी के अंर्तगत गैण्डा स्वछंद विचरण हेतु तीसरे चरण के अवमुक्त अभियान के तीसरे दिन के प्रथम प्रहर में थोड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार ट्रेंकुलाइज हुआ इस चरण का चौथा गैण्डा। इसी के साथ स्वछंद विचरण करने के इस चरण के अभियान को दिया गया अल्पविराम। आज एक बार फिर महावत एवं चाराकटरों द्वारा प्रातः पूर्व चिन्हित मादा गैण्डा की खोज प्रारंभ की गई। आज कल की अपेक्षा गैण्डा थोड़ा विलंब से पता लग पाया। गैण्डा का पता लगता ही सभी टीमों द्वारा पहुॅचकर गैण्डे को ट्रेंकुलाइज किया गया। तदुपरांत उसे सुरक्षित रुप से विशेषज्ञों एवं उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में अवमुक्त कर दिया गया। कल नर गैण्डा – हर्ष, मादा गैण्डा – सुषमा एवं मादा गैण्डा – राशी को अवमुक्त किया गया था वहीं आज (दीपा का प्रथम बच्चा) मादा गैण्डा को स्वछंद विचरण हेतु अवमुक्त किया गया।
आज का भी पूरा कार्यक्रम डॉ0 एच0 राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर-खीरी के निर्देशन में जगदीश आर0 उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी की उपस्थिति में संपादित हुआ। इसमें पद्मश्री एवं विशेषज्ञ डॉ0 के0के0 शर्मा, प्रो0 एवं हेड डिपार्टमेंट आफ सर्जरी एवं रेडियोलाजी, कालेज आफ वेटनरी साइंस, गुआहाटी असम, श्री अमित षर्मा, लीड कंजर्वेषन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, डॉ0 जी0 अरिंद्रन, डायरेक्टर, आईजीसीएमसी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, नई दिल्ली, डॉ0 मुदित गुप्ता, विष्व प्रकृति निधि तराई आर्कलैण्ड, मनीष सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, पीलीभीत, महावीर सिंह, वन्य जीव प्रतिपालक, दुधवा, दीपक कुमारपाण्डेय, उप प्रभागीय वनाधिकारी बेलरायां, डॉ0 मो0 तलहा, पषु चिकित्सक, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी, डॉ0 दयाषंकर, पशु चिकित्सक, दुधवा टाइगर रिजर्व (बफर जोन), लखीमपुर-खीरी, डॉ0 दीपक वर्मा, पशु चिकित्सक, कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग, बहराइच, योगेश पशु चिकित्सक, गोरखपुर चिड़ियाघर, रमेश कुमार, प्रधान लिपिक एवं शिविर प्रभारी, रोहित रवि, सीनियर प्रोजेक्ट आफिसर, विश्व प्रकृति निधि,संदीप फार्मासिस्ट, सुशांत सिंह, भण्डार प्रभारी, सुरेन्द्र कुमार, उप क्षेत्रीय वन अधिकारी, विपिन कुमार कपूर सैनी, आउटरीच प्रोग्राम इंचार्ज, अपूर्व गुप्ता, बायोलाजिस्ट, स्वास्थ्य टीम, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पलिया, दुधवा टाइगर कंजर्वेशन टीम, बायोलाजिस्ट, क्षेत्रीय वन अधिकारी, दक्षिण सोनारीपुर, दुधवा, बेलरायां, महावत, चाराकटर, व अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।