(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलियाकलां (खीरी) दिनांक: 02 फरवरी 2026
विश्व आर्द्रभूमि दिवस एवं बर्ड फेस्टिवल के अवसर पर दुधवा टाइगर रिज़र्व प्रभाग, पलिया खीरी की समस्त रेंजों में जागरूकता, शैक्षिक एवं संरक्षण आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण, प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के महत्व तथा जैव विविधता के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।
दुधवा टाइगर रिज़र्व प्रभाग द्वारा विद्यालयी विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ चित्रकला प्रतियोगिता, जागरूकता गोष्ठियाँ, प्रकृति शिक्षण सत्र एवं शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को आर्द्रभूमि क्षेत्रों में ले जाकर पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके आवास, प्रवास व्यवहार तथा आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिक भूमिका के बारे में जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रमों के माध्यम से यह बताया गया कि आर्द्रभूमियाँ जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण एवं जलवायु संतुलन बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु स्वच्छता, अतिक्रमण नियंत्रण एवं सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर भी बल दिया गया।
इसी क्रम में किशनपुर रेंज अंतर्गत कटैया चौकी परिसर में दिनांक 02.02.2026 को एक विशेष जागरूकता, गोष्ठी एवं बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन दुधवा टाइगर रिज़र्व के बायोलॉजिस्ट विपिन कपूर सैनी द्वारा किया गया। उन्होंने विश्व आर्द्रभूमि दिवस की थीम, आर्द्रभूमियों की परिभाषा, उनके प्रकार तथा पारिस्थितिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमियाँ प्राकृतिक जल भंडारण इकाइयाँ हैं, जो वर्षा जल को संचित कर बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण एवं सूखे के प्रभाव को कम करने में सहायक होती हैं। आर्द्रभूमियाँ प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ मछलियों, उभयचरों, सरीसृपों एवं अनेक सूक्ष्म जीवों के जीवन चक्र का आधार हैं तथा कार्बन अवशोषण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को रामसर कन्वेंशन, रामसर स्थलों की अवधारणा तथा भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही आर्द्रभूमियों पर बढ़ते अतिक्रमण, प्रदूषण एवं जल प्रवाह में परिवर्तन जैसे खतरों के प्रति जागरूक करते हुए उनके संरक्षण हेतु सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कटैया चौकी क्षेत्र में आयोजित बर्ड वॉचिंग गतिविधि के दौरान 60 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसमें लगभग 300 से अधिक पक्षियों का अवलोकन किया गया। विद्यार्थियों को पक्षियों की पहचान, व्यवहार एवं संरक्षण से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर वन्यजीव प्रतिपालक, किशनपुर रेंज महोदय द्वारा उपस्थित सभी प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों को आर्द्रभूमि एवं प्रवासी पक्षियों के संरक्षण की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में डब्लू डब्लू एफ इंडिया के स्टाफ सदस्यों — राधेश्याम, समर्थ जैन, अभिषेक, गजराज एवं अजय — द्वारा सक्रिय सहभागिता की गई। इनके सहयोग से विद्यार्थियों हेतु चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने आर्द्रभूमि, जल संरक्षण एवं पक्षी संरक्षण विषयों पर अपने विचार चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में धर्मेन्द्र द्विवेदी, एस.डी.ओ. (वन्यजीव प्रतिपालक, किशनपुर रेंज) उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मो. अयूब, क्षेत्रीय वन अधिकारी किशनपुर रेंज; नवीन दिवाकर, क्षेत्रीय वन अधिकारी मैलानी रेंज; संदीप शर्मा (पत्रकार); राधेश्याम एवं जयप्रताप; अभिषेक एवं अजय; आनंद लाल; नरेंद्र कुमार (व.जी.-20); हेमा पटेल; शिवा सिंह (व.द.); अमित कुमार दीक्षित (व.-80) सहित वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन आर्द्रभूमियों के दीर्घकालिक संरक्षण, स्वच्छ जल संसाधनों के सतत उपयोग एवं प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने हेतु सामूहिक संकल्प के साथ किया गया। इसकेअलावा गौरी फंटा सोनारीपुररेंज आदि में संपन्न हुये।
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