
(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) तेज महेन्द्रा सरस्वती विद्या मन्दिर पलिया में धूमधाम के साथ सरस्वती प्राकट्य उत्सव एवं विद्यारम्भ संस्कार हुआ सम्पन्न आज दिनांक 23.01.2026 दिन शुक्रवार को विद्याभारती विद्यालय श्री तेज महेन्द्रा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पलिया कलां खीरी में वीणापाणिनि, ज्ञान- विज्ञान की अधिष्ठात्री मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस एवं विद्यारंभ संस्कार पूर्ण श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मां शारदा के समक्ष आये हुये अतिथि महानुभावों ने दीपप्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वजीत दास जी (वन बीट के प्रधानाचार्य) एवं धर्मपत्नी श्रीमती दीप्ती मय दास , मंजेश प्रशासनिक अधिकारी अमित पाल , प्रो. रचित शुक्ला ,. विशिष्ट अतिथि डॉ. नीतू वर्मा ,पूर्व छात्र सिद्धार्थ बाजपेई एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती गीतांजलि अग्रवाल ने की । मंदिर के पुजारी उत्कर्ष जी एवं वरिष्ठ आचार्य सुनीत , सौरभ जी,सुनील महामहेश ,अरुण , वीरेंद्र एवं विद्यालय में आए सभी सम्मानित अतिथि महानुभावो ने सुन्दर काण्ड पाठ एवं हवन पूजन किया। माननीय प्रधानाचार्य रामप्रताप के द्वारा मंचासीन अतिथियों का परिचय व रोली बैज एवं स्मृति चिह्न के साथ सम्मानित करवाया गया। इसके पश्चात विद्यालय में आये हुये 130 नन्हे-मुन्ने भैया/बहिनों का विद्यारम्भ संस्कार आचार्य परिवार के द्वारा कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के समक्ष स्वागत गीत के साथ हुआ। वैसे तो बालक की प्रथम पाठशाला परिवार एवं प्रथम शिक्षिका उसकी मां होती है तथापि आज ही के दिन विद्यालयों में विद्यारंभ संस्कार कार्यक्रम करवाया जाता है उसके उपरांत शिशु का पठन-पाठन प्रारंभ कराया जाता है। इस अवसर पर बहिन सौम्या शुक्ला ने विद्यारंभ संस्कार क्यों? विषय पर विचार रखते हुए कहा कि विद्यारंभ संस्कार (शिक्षा की शुरुआत) बच्चे को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने के लिए किया जाता है, जो आमतौर पर 3-5 साल की उम्र में होता है इसका मुख्य उद्देश्य ज्ञान के प्रति रुचि जगाना, बुद्धि तेज करना और जीवन में शिक्षा के महत्व को समझाना है। यह संस्कार सरस्वती और गणेश पूजन के साथ संपन्न होता है, जो विद्या का आशीर्वाद पाने और शिक्षा में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए किया जाता है।। इसके पश्चात शिशु मंदिर के भैया /बहनों के द्वारा एक अभिनय गीत प्रस्तुत किया गया आज ही के दिन पंजाब के स्यालकोट में जन्में वीर हकीकत राय का धर्म रक्षा हेतु बलिदान विषय पर बहिन निधि तिवारी ने अपने विचार रखे। लेखनी के धनी कविवर सूर्यकांत त्रिपाठी का जन्म आज ही के दिन इलाहाबाद में हुआ था, उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर बहिन सूर्यांशी ने अपने विचार रखे। मां शारदा का जन्मोत्सव एवं बसंत पंचमी के महत्व पर कार्यक्रम की संचालिका श्रीमती शिल्पी नाग ने अपने विचार रखे। आज ही के दिन 23 जनवरी को कटक- उड़ीसा में जन्मे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर बहिन मनोरमा ने अपने विचार सभी के समक्ष रखे। तदुपरांत शिशु मंदिर के भैया /बहनो ने लव कुश कथा नृत्य के माध्यम से व बहन वैष्णवी ने वंशीधर शुक्ल जयंती पर अपने विचार रखे । आज ही के दिन शिशु वाटिका में प्रवेश हेतु नन्हे मुन्ने भैया बहनों का विद्यारंभ संस्कार भी कराया गया। विशिष्ट अतिथि वन बीट से अभिजीत दास ने सभी भैया -बहनो को आशीर्वचन देते हुए उन्हें भावी जीवन में यशस्वी एवं अपने लक्ष्य में सफल होने हेतु शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम अध्यक्ष माननीय सलिल अग्रवाल एवं धर्मपत्नी श्रीमती गीतांजलि अग्रवाल ने सभी भैया – बहनो को आशीर्वचन प्रदान किया। व्यवस्थापक माननीय रामबचन तिवारी ने आए हुए अतिथि महानुभाओ के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि विद्या ददाति विनयं, विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धानमाप्नोति धानाद्धर्मं ततः सुखम्॥”
अर्थात विद्या विनय (नम्रता) देती है, विनय से पात्रता (योग्यता) आती है। योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म होता है और धर्म से ही सच्चा सुख मिलता है।
विद्यालय के अध्यक्ष चाँद कुमार जैन ने विद्यारंभ संस्कार के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चे में ज्ञानवर्धन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, शिष्टाचार और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नगर कार्यकारिणी के पदाधिकारी बंधु , नगर प्रचारक माननीय योगेंद्र , अभिषेक शुक्ला , प्रबंध समिति के सभी सम्मानित पदाधिकारी बंधु, अभिभावक बंधु विद्यालय का समस्त आचार्य परिवार उपस्थित रहा।कार्यक्रम का समापन सभी भैया/बहनों एवं आए हुए सभी सम्मानित अतिथि महानुभव एवं गणमान्य पत्रकार बंधु व अभिभावक बंधुओ को प्रसाद वितरण एवं शान्ति मन्त्र के साथ किया गया ।
