(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) दिनांक 15-01-2026, दिनांक गुरूवार को विद्याभारती विद्यालय श्री तेज महेन्द्रा सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पलिया कलां -खीरी में मकर संक्रांति का उत्सव पूर्ण श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य रामप्रताप सिंह, प्रबंध समिति के सभी पदाधिकारी महानुभावों के द्वारा मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन ,पुष्पार्चन एवं वंदना के उपरांत कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रधानचार्य रामप्रताप सिंह ने विद्यालय में पधारे सभी सम्मानित अतिथि महानुभावों को बताया कि जितने भी हिंदू धर्म के त्यौहार मनाये जाते हैं वह सभी सूर्य अथवा चंद्रमा की गतियों के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं और पूर्णतया वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरते हैं। उन्हीं में से सूर्य की गति पर आधारित मकर संक्रांति का त्यौहार है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। ऐसा मानना है कि प्रतिवर्ष सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने में 20 मिनट ,3 वर्षों में 1 घंटे तथा 72 वर्षों में एक दिन का विलम्ब करता है इस कारण मकर संक्रांति अब 14 जनवरी के बजाय 15 जनवरी को मनाई जाती है। वरिष्ठ आचार्य रवीन्द्र जी ने बताया कि मकर संक्रांति सूर्य उपासना का पर्व है और सूर्य द्वारा धनु राशि से मकर राशि के प्रवेश होने के उपलक्ष में मनाया जाता है। इस पर्व पर पवित्र नदियों में स्नान करने और दान देने का विशेष महत्व है।इस पर्व के बारे में कहा जाता है कि इस दिन मकर राशि के स्वामी शनिदेव से उनके पिता भगवान सूर्य मिलने के लिए आते हैं, इस कारण यह पर्व पारिवारिक भाव का एक अच्छा उदाहरण है। भौगोलिक दृष्टि से इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है इस कारण दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं और सूर्य की गर्मी में तीव्रता आने लगती है। इस पर्व के साथ प्रकृति में परिवर्तन दिखाई देने लगता है,अर्थात यह प्रकृति में परिवर्तन का भी पर्व है। आज ही के दिन गंगाजी राजा सगर के पुत्रों के उद्धार हेतु ब्रह्माजी के आश्रम से निकलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में मिलती हैं।इस दिन सभी खिचड़ी सहभोज करते हैं एवं तिल गुड़ से बनी वस्तुएं खाते और दान करते हैं, इस कारण यह पर्व सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है।विद्यालय के प्रबंधक रामबचन तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यत्र दालं च धान्यं च, मिलित्वा भवति एकम्, सा खिचड़ी परम् प्रोक्ता, सर्वेषां हितकारिणी” हो सकता है, अर्थात जहाँ दाल और अनाज मिलकर एक हो जाते हैं, वह खिचड़ी कहलाती है और सभी के लिए हितकारी है। विद्यालय के अध्यक्ष चाँद कुमार ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर खिचड़ी का दान करना शुभ माना जाता है, जो ज़रूरतमंदों को भोजन कराने और पुण्य कमाने का अवसर देता है।इस अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर का समस्त आचार्य परिवार के द्वारा आए हुए सभी अतिथि महानुभावों को खिचड़ी भोज कराया गया ।इस शुभावसर पर प्रबंध समिति के सभी अतिथि महानुभव, भारतीय जनता पार्टी पलिया नगर की समस्त कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं सदस्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी पदाधिकारी एवं स्वयं सेवक, एकल विद्यालय एवं सरस्वती विद्या मंदिर के दोनों संस्कार केंद्र के सभी अध्यापक बंधु एवं भैया/बहन उपस्थित रहे कार्यक्रम के अंत में सरस्वती विद्या मंदिर के दोनों संस्कार केंद्र एवं एकल विद्यालय के सभी आचार्य बंधु /बहिनी जी एवं भैया/ बहनो में कंबल वितरित किये गए ।कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ किया गया ।
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