(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) सादर अवगत कराना हैं कि झंडेवालान नई दिल्ली में आदि गुरु गोरखनाथ जी के परम शिष्य श्री श्री 1008 बाबा पीर रतन नाथ जी महाराज जी का सनातन धर्म का पौराणिक स्थान हिन्दू रीति रिवाज के साथ स्थापित हैं। लगभग 1365 वर्ष पहले नेपाल में दांग देश जो वर्तमान में रतनपुर मठ के नाम से प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं जो कि राजा परक्षित जी के पुत्र भगवान शंकर के अंश आदि गुरू गोरखनाथ जी के परम शिष्य बाबा श्री पीर रतन नाथ जी ने खुरासान में नाथ सम्प्रदाय के केंन्द्र के रूप में प्रथम गुरु के रूप में काबुल अफगानिस्तान में सनातन धर्म की ध्वजा के साथ स्थापित किया (जहाँ आज भी सनातन धर्म की परम्परा के अनुसार पूजा अर्चना चल रही है)। और लगभग 700 वर्ष धरती पर रहकर सनातन धर्म की बाबा गुरू गोरक्षनाथ जी के आदेश पर इस्लामिक जेहाद से रक्षा की।अंतिम समय में शिव पुरी प्रस्थान से पूर्व अपनी समस्त विरासत अर्थात् गादी सिंहासन अविवाहित ब्राहम्ण को दान कर गये। पौराणिक परम्परा के अनुसार इस समय गादी पर 31वें ईश्वरीय स्वरूप महाराज जी विराजमान हैं और सनातन धर्म की ध्वजा को सशक्त करने का कार्य कर रहे हैं एवं लाखों अनुयायियों के पालनहार एवं आराध्य के रूप में आस्था के केन्द्र है।स्थान पर प्रातः अमृतकाल में भगवानों की आरतियों के बाद पूरे समय राम नाम के जाप सत्संग चलता है सांयकाल गोधूल बेला में भगवानों की आरतियाँ होती हैं। प्रतिदिन हजारों सेवक परिवारों का पूरे देश से आवागमन रहता हैं। सेवकों के लिए निरंतर लंगर प्रशाद की सेवा चलती रहती हैं साथ ही स्थान की ओर से गरीबों, अपाहिजों, कोढियों को उनकी बस्तियों में जाकर लंगर प्रसाद एवं कम्बल वितरण करने का कार्य भी निरंतर चलता हैं विभिन्न शहरों में सेवकों द्वारा निशुल्क लंगर प्रशाद, शर्बत की सेवा चलाई जाती हैं।समय समय पर स्थान द्वारा गरीब असहायों के लिए मेडिकल कैम्प लगाकर निःशुल्क दवा वितरण का कार्य भी किया जा रहा हैं। वर्तमान में श्री गुरु महाराज जी के द्वारा विभिन्न स्थानों पर गोशाला स्थापित हैं तथा गौ सेवा चल रही हैं। गौ माता के लिए निशुल्क दवाइयों, कम्बल, हरे चारे का वितरण भी निरंतर किया जाता है।यह स्थान अफगानिस्तान काबुल से प्रारंभ होकर दिल्ली तक की यात्रा तय कर चुका है, इसी के साथ देश विदेश में मिलाकर लगभग 50 और स्थानों पर भी पूजा अर्चना हो रही हैं। स्थान के सेवक परिवार जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, लंदन, अमेरिका, कनाडा आदि स्थानों से जुड़े हुए हैं। अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान में भी स्थान बने हुए हैं। हमारे मंदिर दरगाह लखनऊ, गोला, पलिया, बरेली, कानपुर, चंदौसी, सैमल, मेरठ, हापुड़, उत्तर काशी देहरादून, अमृतसर, हरिद्वार, चंडीगढ़, लुधियाना, कोपरगाँव, ग्वालियर, अहमदाबाद आदि 40 शहरों में बने हुए हैं और देश के सभी राज्यों में हमारे अनुयायी रहते हैं, जहाँ आज भी सनातन धर्म की पूर्ण विधि विधान से पूजा अर्चना का कार्य चल रहा है, सभी स्थानों के मुख्तयता अनुयायी अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान से बैंटवारे में आए हुए हिंदू पजाबी परिवार हैं जो शुरू से भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित है। मंदिर के लाखों अनुयायी भारत के विभिन्न राज्यों में निवास कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्षों से सनातन धर्म के जागरण का काम कर रहा है जो अत्यंत सराहनीय हैं।दिनांक 29.11.2025 को अचानक DDA & MCD के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ स्थानीय SDM महोदय को साथ लेकर मंदिर दरगाह के आगे के कुछ मकान तोड़ने की बात कहने वाले परंतु उन मकानों को तोड़ने के साथ ही मंदिर दरगाह की बाउंड्रीवाल पुष्पवाटिका, पानी की टंकिया, सीवर लाईन, अस्थाई लंगर, प्रसाद हाल बिजली का पैनल का रूम, दो लोहे के गेट आदि भी तोड़ दिया। कारण और आदेश के बारे में पूछने पर उनका कहना था कि हमको ऊपर से आदेश हैं. हमारी कोई बात नहीं सुनी गई। मंदिर दरगाह का कलेम उस भूमि पर हैं जहाँ 1948 से कब्जा है और 1973 से लीज है बाकी हमारा कोई विरोध विवाद नहीं है। 29.11.2025 को जो मंदिर दरगाह की भूमि पर गैर कानूनी तरीके से अतिक्रमण हटाने के नाम पर ध्वस्तीकरण कर स्टील की बेरीकेंटिंग लगाई गई उसे हटाया जाए और मंदिर को अपनी जमीन बॉउंड्री वाल बनाने दिया जाये। इस प्रकरण से पूरे विश्व मंदिर दरगाह के अनुयायियों और सनातन धर्म के मानने वाले सभी नागरिकों एवं साधु संतों में भारी रोष है।आप से सादर अनुरोध है कि श्री मंदिर दरगाह की जमीन मंदिर को ही आवंटित की जाये। आपकी महान कृपा होगी। ज्ञापन देने वालों मानिकचन्द्र अरोडा मंदिर दरगाह श्रीबाबा पीर रतन नाथ जी पेशावर बाले, पलिया कलां खीरी व अन्य सेवक भक्तगण।

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