(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) दिनांक 23.09.2025 को कमांडेंट रबीन्द्र कुमार राजेश्वरी के दिशा-निर्देशानुसार 39वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, पलिया में ‘10वें आयुर्वेद दिवस’ के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया । इस अवसर पर वाहिनी मुख्यालय से लेकर गाँव महँगापुर तक पैदल मार्च निकाला गया, जिसमें वाहिनी के अधिकारीगण एवं अन्य कार्मिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया । रैली के दौरान ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि आयुर्वेद व्यक्ति के स्वास्थ्य को पर्यावरण, शरीर, मन और आत्मा के गतिशील एकीकरण के रूप में देखता है । आयुर्वेद न केवल रोगों के उपचार में सहायक है, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण, संवर्धन और रोगों की रोकथाम पर भी विशेष बल देता है । साथ ही, योग और आयुर्वेद प्राचीन भारतीय चिकित्सा एवं जीवनशैली विज्ञान हैं, जिनका महत्व स्वस्थ शरीर और शांत मन प्राप्त करने में अत्यधिक है । जहाँ आयुर्वेद शरीर के तत्वों के संतुलन और आहार-विहार पर ध्यान केंद्रित करता है, वहीं योग आसन एवं ध्यान के माध्यम से मन, शरीर और आत्मा को एकीकृत करता है । ये दोनों मिलकर स्वास्थ्य का समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, जो शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है । कार्यक्रम के अंतर्गत वाहिनी चिकित्सालय में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. अभिषेक सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय आयिर्वेदिक चिकित्सालय कड़िया (डांगा), जिला लखीमपुर खीरी द्वारा कार्मिकों को आयुर्वेद से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गई । इस अवसर पर वाहिनी के अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे ।

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