(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) गोला गोकर्णनाथ -खीरी कविता के प्रवाह में जब शब्द आत्मा से फूटते हैं, तो इतिहास बनता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया कपिलश फाउंडेशन ने, जब पूरे देश से आई 105 से अधिक कवयित्रियों ने मिलकर विश्व का सबसे लम्बा कवयित्री सम्मेलन आयोजित कर 54 घंटे लगातार कविता पाठ कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर दिया।
रॉयल लॉन, गोला गोकर्णनाथ में आयोजित “कवयित्री महाकुंभ” ने नारी सशक्तिकरण, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक गरिमा को नई ऊँचाई प्रदान की। यह आयोजन “द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स – दुबई” द्वारा आधिकारिक मान्यता प्राप्त विश्व रिकॉर्ड बन गया है।
जब संवेदना बनी कविता, और कविता बनी आंदोलन
तीन दिवसीय इस महाकुंभ का उद्देश्य केवल काव्यपाठ नहीं, बल्कि नारी आत्मा की आवाज़ को एक राष्ट्रीय मंच देना था। “कविता की गंगा में अवगाहन” के इस महायज्ञ में, देशभर की नवोदित और स्थापित कवयित्रियों ने प्रेम, देशभक्ति, आध्यात्मिकता और नारी चेतना जैसे विषयों पर अपने भाव प्रस्तुत किए।
देशभर से आईं रचनाकाराएं, मंच पर बिखरी काव्य-कुशलता
कवयित्रियों की सूची में कई नाम राष्ट्रीय पटल पर प्रसिद्ध हैं। इनमें प्रमुख थीं:
सुफलता त्रिपाठी (लखनऊ) – राष्ट्रीय स्तर की सुप्रसिद्ध कवयित्री
शेफालिका झा (बिहार), दिव्या मीरा, मीनाक्षी शुक्ला, रेखा बोरा (लखनऊ)
मनीषा जोशी (नोएडा), डॉ. कुसुम चौधरी, संदीपिका दीक्षित, इशरत सुल्ताना (लखनऊ)
सीमा मिश्रा (सीतापुर), स्वाति गोयल (गाज़ियाबाद), लक्ष्मी कनोडिया (खुर्जा)
गुंजन अग्रवाल (कासगंज), रोशनी कुंवर (उत्तराखंड), सावित्री जावड़ा (हरियाणा)
अंजलि डुडेजा (दिल्ली), सुमन श्री मिश्रा (भोपाल)
स्मिता तिवारी, प्रिया मिश्रा (गोला), अनन्या शुक्ला, सोनम वर्मा (लखीमपुर)
कपिलश फाउंडेशन की अध्यक्ष व संस्थापक शिप्रा खरे, जिन्होंने अपनी भावनात्मक और ओजस्वी रचनाओं से दर्शकों को बांधें रखा ”
समापन समारोह में कपिलश फाउंडेशन की ओर से “कवयित्री कलश” नामक साझा काव्य संग्रह का विमोचन हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागी कवयित्रियों की रचनाएँ संकलित हैं। यह संग्रह आने वाली पीढ़ियों के लिए नारी संवेदना और साहित्यिक उत्कृष्टता का दस्तावेज़ बनकर रहेगा।
द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से मिली मान्यता

विश्व रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए द बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, दुबई के वरिष्ठ प्रतिनिधि समीर सिंह स्वयं कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजन की प्रमाणिकता सुनिश्चित की और सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, मेडल व ट्रॉफी प्रदान कर इस महाकुंभ को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान की। विशिष्ट अतिथियों ने बढ़ाया हौसला महाकुंभ के दौरान कई सम्माननीय व्यक्तित्व लगातार उपस्थित रहकर कवयित्रियों का मनोबल बढ़ाते रहे। इनमें शामिल थे:
पूर्व विधायक विनय तिवारी बी० एच० एल के अवनि पाण्डेय डॉ. उमेश वर्मा, डॉ. वी बी धुरिया, वैद्य रामजी रस्तोगीवरिष्ठ साहित्यकार बी पी मिश्र बेधड़क, स्व. कपिल देव खरे की स्मृति में वर्ष 2017 में स्थापित कपिलश फाउंडेशन, अब एक विश्व-कीर्तिमानधारी सांस्कृतिक संगठन बन चुका है। इसका उद्देश्य केवल साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि कविता को सामाजिक चेतना का माध्यम बनाना है।
संस्था की संस्थापक अध्यक्ष शिप्रा खरे के नेतृत्व में कपिलश फाउंडेशन ने कई अभूतपूर्व आयोजन किए हैं, जो साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक सुधार का माध्यम भी बनते हैं।
जैसा कि कपिलश का उद्घोष है:
“यह यात्रा केवल उपलब्धियों का संग्रह नहीं; यह एक संवेदना, एक प्रतिष्ठा और एक दायित्व है।”
भविष्य की दिशा: महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र निर्माण तक यह कवयित्री महाकुंभ साबित करता है कि कविता केवल मनोरंजन नहीं, वह परिवर्तन का माध्यम है। कपिलश फाउंडेशन आने वाले वर्षों में भी महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संवर्द्धन और साहित्यिक नवाचार के लिए ऐसे आयोजन करता रहेगा।

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