
(न्यूज़ -राजीव गोयल)
पलिया कलां (खीरी) बांकेगंज।
गोला और मैलानी वन क्षेत्र के तमाम गांवों में पालतू पशुओं और एक बारह वर्षीय किशोर को मारने वाली बाघिन वनकर्मियों के दो माह के प्रयास के बाद अंततः रात में पिंजरे में कैद हो गई। जिससे वनकर्मियों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
रत्नापुर, बलारपुर, कुंवरपुर, चौधीपुर, ढाका, देवीपुर, महरताला, बंजरिया सहित तमाम गांवों में घुसकर पालतू पशुओं का शिकार करने तथा एक बारह वर्षीय किशोर प्रदीप कुमार को अपना निवाला बनाने वाली बाघिन को पकड़ने की कवायद 23 जून से शुरू कर दी गई थी जबकि वनकर्मियों को उसे ट्रेंकुलाइज करने के निर्देश उच्चाधिकारियों से प्राप्त हो गए थे। इसके लिए कई कैमरे लगाए गए थे। रत्नापुर, लौकिहा तथा ढाका में पिंजरे लगाए गए थे। डॉक्टर दयाशंकर, गोला रेंजर संजीव तिवारी तथा दक्षिणी प्रभाग के डीएफओ स्वयं दो दिन तक रत्नापुर, बलारपुर के पास ड्रोन उड़ाकर बाघिन की लोकेशन जानने के लिए प्रयास करते रहे परंतु असफलता हाथ लगी। इस बीच तेज बारिश होने के कारण खेतों में पानी भर जाने से बाघिन दूसरे क्षेत्र में चली गई और बाघिन को पकड़ने की कवायद धीमी हो गई। नागपंचमी से कुछ दिन पहले उसकी लोकेशन ग्रंट नंबर 11 के देवीपुर गांव के पास मिली जहां उसने गांव के अशोक और रामू की बकरियों को निवाला बनाया। ग्रामीणों के विरोध के बाद वन विभाग ने रामू के घर के पास एक पिंजरा लगवा दिया जिसमें प्रतिदिन शाम को आकर एक व्यक्ति बकरी बांध जाता था। बीती रात भी उसमें बकरी बांधी गई थी जिसमें रात करीब दो बजकर पंद्रह मिनट पर बाघिन उसमें फंस गई। उसके बाद दक्षिण खीरी प्रभागीय वनाधिकारी संजय बिसवाल, वन रेंजर गोला संजीव कुमार तिवारी, वन दरोगा अजित श्रीवास्तव, अफज़ल खान, अंकित बाबू , अजय भार्गव, शैलेन्द्र कुमार त्रिवेदी, राम नरेश, वनरक्षक धीरेन्द्र सिंह, अभिलाष मिश्रा अपने अन्य वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे तथा अंधेरे में ही पिंजरे को उठवाकर ले गए।
रेंजर संजीव तिवारी ने बताया कि बाघिन को पिंजरे में कैद कर लिया गया है। इसकी उम्र लगभग चार वर्ष है। मैने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। उनके आदेशानुसार निर्णय लिया जाएगा कि बाघिन को कहां भेजा जाए।
अंधेरा होने के बावजूद बाघिन को देखने के लिए लगी रही भीड़
ग्रामीणों ने बताया कि रात करीब सवा दो बजे बाघिन पिंजरे में फंसी। उस समय गांव में कोई भी वनकर्मी नहीं था। पिंजरे का गेट गिरने पर जब तेज आवाज आई तब हम लोगों ने टॉर्च जलाकर देखा। बाघिन पिंजरे में कैद थी तथा तेजी से दहाड़ रही थी। उसके बाद अंधेरा होने के बावजूद ग्रामीण टॉर्च लेकर उसे देखने के लिए आते रहे। जब वनाधिकारी मौके पर पहुंचे तथा पिंजरे को ढक दिया गया तब लोगों का आना कम हो गया। उजाला होने से पहले ही वनकर्मी पिंजरे को उठा ले गए।
