यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः, स पण्डितः स श्रुतवान् गुणज्ञः।स एव वक्ता स च दर्शनीयः, सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति।। (नीति शतक) इसका अर्थ है कि जिसके पास धन है, वही कुलीन, पंडित, शास्त्रज्ञ, गुणग्राही, वक्ता और दर्शनीय है।
कलयुग केवल धन आधारा
कलयुग केवल पैसे के लिए जाना जाता है व्यक्ति की योग्यता उसका महत्व उसकी उम्र या शिक्षा से नहीं होता है वरन उसके स्तर का आकलन उसके पैसे से ही होता है । जिसके पास पैसा ज्यादा होजाता है वह फोन उठाना बंद कर देता है शायद ही कभी-कभी फोन उठाए । जब पैसा और ज्यादा आ जाता है तो लोगों को पहचाना ही बंद कर देता है। पहचानता ही नहीं जब और पैसा आ जाता है तो अपने पारिवारिक जनों को भी नहीं पहचानता है।
