


(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलियाकलां- (खीरी)लखीमपुर खीरी, 12 जून। जिले में अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल श्रम के विरुद्ध जन-जागरूकता की अलख जगी। गुरुवार को डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने बाल श्रम निषेध सप्ताह (12 से 17 जून) के अभियान का फीता काटकर विधिवत शुभारंभ किया।
डीएम ने हस्ताक्षर अभियान का भी आगाज करते हुए अधिकारियों, बच्चों और नागरिकों से बाल श्रम के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर बच्चा किताबों का हकदार है, न कि काम की जिम्मेदारी का। समाज तभी प्रगतिशील कहलाएगा जब उसका हर बचपन सुरक्षित और शिक्षित होगा।
डीएम ने कहा कि हर वर्ष 12 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज को बाल श्रम जैसी कुप्रथा के प्रति जागरूक करना और इसके उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहभागिता हेतु प्रेरित करना है। हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और बचपन का अधिकार मिलना चाहिए।
*बालश्रम के खिलाफ शहर की सड़कों पर गूंजा चेतना का संदेश, डीएम ने रैली को दिखाई हरी झंडी*
शहर में बाल श्रम के खिलाफ निकाली गई जन-जागरूकता रैली कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने कलेक्ट्रेट परिसर से हरीझंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। यह रैली विलोबी मेमोरियल होते हुए सदर चौराहे पर समाप्त हुई, जिसमें स्कूली बच्चों, स्वयंसेवी संस्थाओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान एडीएम (न्यायिक) अनिल कुमार रस्तोगी, एसडीएम अमिता यादव, श्रम प्रवर्तन अधिकारी संतोष त्रिपाठी, प्रियंका वर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
*बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी, 140 मामलों का हुआ चिन्हांकन*
श्रम प्रवर्तन अधिकारी संतोष त्रिपाठी ने बताया कि बाल श्रम अधिनियम के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में श्रम विभाग लखीमपुर खीरी द्वारा 106 स्थलों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 140 बाल श्रम से जुड़े मामलों की पहचान की गई, जिनमें 4 खतरनाक व 136 गैर-खतरनाक कार्य श्रेणी में आए। अब तक कुल 80 मामलों में विधिक अभियोजन दर्ज किया गया है। प्रशासन ने 11 बच्चों का शैक्षिक पुनर्वासन सुनिश्चित किया, जबकि 1 मामले में आर्थिक पुनर्वासन की कार्रवाई की गई। साथ ही, एक सेवायोजक से ₹20,000 की वसूली भी कराई गई।
