(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलियाकलां- (खीरी)लखीमपुर खीरी, 04 अप्रैल। “संकेतों की शक्ति से रोशन होते सपने, जहां हर प्रतिभा को मिलता है एक नया आसमान!” इसी संदेश को साकार करते हुए लखीमपुर खीरी के रिसोर्स सेंटर में कार्यरत स्पेशल एजुकेटर श्रीमती नीरज शर्मा दिव्यांग बच्चों के जीवन में शिक्षा और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी फैला रही हैं। उनके अथक प्रयासों से ये बच्चे न केवल पढ़ाई में आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि कला और संस्कृति के माध्यम से अपनी अनूठी पहचान भी बना रहे हैं।
चैत्र नवरात्र के शुभ अवसर पर, मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने उनके इस अनुकरणीय कार्य को सम्मानित करते हुए महिला सशक्तिकरण की अनूठी पहल के तहत नीरज शर्मा को सोशल मीडिया हैंडल्स समर्पित किए, जिससे उनके नवाचारों को व्यापक पहचान मिल सके और अधिक से अधिक लोग इस प्रेरणादायक यात्रा से जुड़ सकें।
नीरज शर्मा बताती है कि मुख्यमंत्री जी के विजन और डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के मार्गदर्शन में हमें दिव्यांग बच्चों को शिक्षित और सशक्त करने का अवसर मिला है। “हर बच्चा खास होता है, बस जरूरत होती है उसे सही मार्गदर्शन और विश्वास देने की। जब हम उनकी भाषा समझते हैं, तो वे न केवल सीखते हैं, बल्कि अपनी क्षमताओं को नए आयाम भी देते हैं। मेरा सपना है कि हर दिव्यांग बच्चा आत्मनिर्भर बने, अपनी पहचान खुद बनाए और दुनिया को दिखाए कि हुनर किसी सीमा का मोहताज नहीं होता।”
*संकेतों की भाषा बनी अभिव्यक्ति का माध्यम*
नीरज शर्मा का मानना है कि हर बच्चा विशेष होता है और सही मार्गदर्शन से अपनी छिपी क्षमताओं को निखार सकता है। वे संकेत भाषा (साइन लैंग्वेज) के माध्यम से बच्चों को पढ़ाती हैं, जिससे वे सीखने और खुद को व्यक्त करने में अधिक सहज महसूस करते हैं।
*संगीत और कला से आत्मविश्वास की उड़ान*
नीरज शर्मा की प्रेरणा से ये बच्चे गानों पर इशारों के माध्यम से प्रस्तुति देते हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है। इनके इशारों पर सजीव होती प्रस्तुति हर किसी के मन को छू जाती है और यह दिखाती है कि कला की कोई भाषा नहीं होती, यह सिर्फ अभिव्यक्ति का माध्यम है।
*सशक्त भविष्य की ओर एक कदम*
नीरज शर्मा का यह समर्पण दिव्यांग बच्चों के लिए एक नई उम्मीद बन चुकी है। उनकी यह पहल न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव ला रही है, बल्कि समाज में दिव्यांगजनों की क्षमताओं को पहचानने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।