दशकों बाद उच्च न्यायालय के 15 जनवरी 2025 के आदेश के आधार पर सुहेली नदी की खुदाई कार्य का हुआ शुभारंभ
पलियाकलां- (खीरी)लखीमपुर खीरी। आखिरकार पांच दशकों के बाद गजियापुर सुहेली साइफन से सुहेली नदी के प्राकृतिक बहाव का रास्ता साफ करने को लेकर बनाई गई चार करोड़ 20 लाख रुपए की परियोजना का बाढ़ मंडल लखीमपुर खीरी के अधिकारियों, एसडीएम व समाजसेवी राजेश भारतीय की मौजूदगी में निघासन विधायक शशांक बर्मा द्वारा फीता काट कर व नारियल फोड़ कर खुदाई के कार्य का शुभारंभ किया गया। हालांकि यह परियोजना कहां तक सफल होती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा। उल्लेखनीय है कि घाघरा बैराज से शारदा नगर बैराज तक निकाली गई शारदा सहायक सिंचाई परियोजना के नीचे से सुहेली नदी के पानी को निकालने के लिए 1972 में 24 बैरल का एशिया का सबसे बड़ा सबसे बड़ा साइफन बनाया गया था। हालांकि सुहेली साइफन बनाने के दौरान सुहेली नदीं की धारा को 12 वैरल के सोती सायफन में मोड़ा गया था।
जिसके बाद से आज तक सुहेली नदी का पानी अपने मूल रास्ते से न बहकर गजियापुर के 24बैरल क्षमता के सुहेली साइफन से नहीं निकल सका और 12 बेरल के सोती साइफन से आंशिक पानी ही निकल रहा था । वहीं सुहेली नदी के वापस अपने मूल रास्ते पर न बहने में वहां नदी की भूमि पर खेती की जा रही थी जिसके कारण सुहेली नदी में बाढ़ आने पर बाढ़ का पानी पलिया व निघासन तहसील क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामों सहित दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में भर जाता था। विगत वर्ष इस समस्या
को किसानों की मांग पर एक समाचार पत्र ने उठाया था। जिस पर फलाहारी गौ सेवा फाउंडेशन, पलिया द्वारा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें 15 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने सुहेली नदी में आने वाली बाढ़ को मानवजनित होना बताया था और चार सप्ताह में सरकार से रसे जवाब मांगा था। जिसको लेकर बाढ़ मंडल लखीमपुर खीरी के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र कुमार सिंह द्वारा चार करोड़ 20 लाख रुपए की
परियोजना बनाई गई।।
गुरुवार को लट्ठौआ घाट के पास छह पीकालेन मशीनों से खुदाई कार्य का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सुहेली साइफन विगत 50 वर्षों से बंद पड़ा था। इसके कारण बाद से करीब 40 गांव प्रभावित होते थे। अब इस समस्या के निराकरण के लिए बार करोड़ 20 लाख रुपए की परियोजना बनी है। अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड अजय कुमार ने बताया कि लट्ठौआ घाट से सुहेली साइफन के आगे तक करीब 17 किलीमीटर की दूरी में नदी में 30 मीटर चौड़ी व 3:30 मीटर गहरी खुदाई की जाएगी। जिससे सुहेली नदी का पानी अपने मूल रास्ते से सुहेली साइफन के नीचे से निकलकर घाघरा नदी में जाकर मिलेगा। समाज सेवी समाचार राजेश भारतीय ने बताया कि पिछले 50 सालों में किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया इस बजह से उन्हें उच्च न्यायालय का सहारा लेना पड़ा और इसी का नतीजा है कि इस वर्ष ही इस समस्या के निदान के लिए परियोजना बनाई गई है। इस अवसर पर किसानों ने कहा कि उन्हें कार्य प्रारंभ होने की खुशी भी है, लेकिन संशय भी है, क्योंकि 2010 में भी ऐसी ही परियोजना उच्च न्यायालय की गठित समिति की सिफारिश पर बनी थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि 6 पोकलेन मशोंने आखिर एक महीने में केसे 17 किलोमीटर की खुदाई कर पाएगी। किसानों ने कहा कि इस परियोजना की हवाई सर्वेक्षण के जरिए निगरानी कराई जानी चाहिए। ताकि सरकार के करोड़ो रुपए सही तरह से खर्च हो और हम लोगों को भी समस्या से निजात मिल सके।