





(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलियाकलां- (खीरी)पिछले 5 दशकों से पलिया निघासन तहसील क्षेत्र के सैकड़ों गांव व दुधवा टाइगर रिजर्व में बाढ़ से तबाही का मुख्य कारण बना गजियापुर , निघासन का बंद पड़ा सुहेली साइफन चालू होने का रास्ता हुआ साफ, किसानों ने साइफन पर पहुंचकर लगाए मुख्यमंत्री योगी जिंदाबाद के नारे, फलाहारी गौसेवा फाउंडेशन एवं समाज सेवी एडवोकेट राजेश भारतीय के प्रयासों के प्रति जताया आभार।विगत वर्ष आई भीषण बाढ़ के समय इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था, जिस पर फलाहारी गौ सेवा फाउंडेशन पलिया, लखीमपुर खीरी द्वारा संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में जनहित याचिका दायर की गई थी ।जिसकी 15 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने सुहेली में आने वाली बाढ़ को माना था मानव जनित बाढ़ , राज्य सरकार से 4 सप्ताह में मांगा था जवाब।हालांकि राज्य सरकार ने चार सप्ताह गुजर जाने के बाद भी उच्च न्यायालय में जवाब तो दाखिल नहीं किया, लेकिन आनन-फानन में अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझ करसुहेली साइफन से लट्ठौआ घाट तक तथा लट्ठौआ घाट से सुहेली साइफन तथा साइफन से घाघरा नदी तक लगभग 13 किलोमीटर का पैच है। अतिक्रमणकारियों द्वारा नदी की उक्त जमीन पर किए गए अवैधानिक अतिक्रमण को हटवाने की परियोजना जरूर बना डाली।अधीक्षण अभियंता बाढ़ मंडल लखीमपुर खीरी द्वारा इस कार्य को लेकर 4 करोड़ 20 लाख रुपए का निकाला गया टेंडर, सूत्रों के अनुसार विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी अपने चहेतों को दिया गया टेंडर,। 4 मार्च 2025 को खुला था टेंडर, इसके बाद करीब 25 दिन भी जाने के बाद भी अभी तक नहीं शुरू हो सका है अतिक्रमण हटाने का कार्य, मौके पर तीन-चार दिनों से खुदाई के लिए पोकलेन मशीने खड़ी हैं।ध्यान देने की बात है। विगत 5 दशकों से इस समस्या पर निघासन के किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं उठाई कोई आवाज, बल्कि जब किसान आवाज उठाते थे, तो कहा जाता है कि वहां के जनप्रतिनिधि उसे दबाने का ही करते कार्य करते थे।लेकिन विगत वर्ष किसानों की मांग पर एक समाचार पत्र ने प्रमुखता से उठाई गई थी यह समस्या, जिस पर फलाहारी गौ सेवा फाउंडेशन पलिया, खीरी की जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय खंड पीठ लखनऊ न्यायमूर्ति राजन राय व ब्रजराज सिंह के निर्देश पर संज्ञान लिया गया है।अब देखना यह होगा कि 4 करोड़ 20 लाख रुपए से बनाई गई इस परियोजना का बाढ़ खंड अधिकारी एवं जिला प्रशासन जमीनी स्तर पर कहां तक इंप्लीमेंट कराते हैं, या फिर यह भी 2010 में बनाई गई परियोजना की तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर फ्लॉप हो सकती है।
हालांकि इस संबंध में बाढ़ खंड अधिशासी अभियंता अजय कुमार का कहना है कि पोकलेन मशीनें मौके पर पहुंच गई है, एसडीएम निघासन को पत्र लिखकर पर्याप्त पुलिसफोर्स मांगी गई है, अतिक्रमण हटाने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है शीघ्र ही परियोजना पर शुरू होगा काम। भले ही इस कार्य को कोई जन प्रतिनिधि बताएं यह कार्य हमारे द्वारा कराया जा रहा है पर संज्ञान में यह आया है किसी भी जनप्रतिनिधि के वजाय यह कार्य उच्च न्यायालय के आदेश पर होना संभव हुआ है संभवत कार्य कल शुरू हो सकता है ।
