(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलियाकलां- (खीरी) श्री रामलीला दशहरा मेला में राम सुग्रीव मित्रता, बालि वध एवं सीता की खोज का मंचन किया गया। सीता की खोज करते श्री राम लक्ष्मण की, हनुमान जी किष्किंधा – पर्वत पर रह रहे सुग्रीव से भेंट कराते हैं। सुग्रीव अपनी वानर सेना सहित उनकी मदद करने को तैयार हो जाते हैं, किंतु इससे पूर्व वह बालि वध की बात आती है। राम राम सुग्रीव को बाली के पास भेज देते हैं दोनों में लंबी लड़ाई चलती है पेड़ की ओट से भगवान राम देखते रहते हैं अंत में “बहु क्षल बल सुग्रीव कर हियँ हारा भय मानि। मारा बालि राम तब हृदय माझ सर तानि”।। अर्थात राम समझ लेते हैं कि छल वल से किसी भी तरह से सुग्रीव बालि से नहीं जीत पा रहा है तव बालि को पेड़ की ओट ले कर मार देते हैं । पलिया के रामलीला मैदान में जटायु प्रसंग सहित अन्य लीलाओं का मंचन तारा का विलाप भी आता है। इसके पश्चात सभी वानर श्री राम के जय घोष के साथ सीता की खोज में जुट जाते हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष चौधरी तेजपाल सिंह, प्रेम प्रकाश पांडेय सहित श्री रामलीला कमेटी के सदस्य गण भी उपस्थित रहे।

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