पलिया कलां (खीरी) भारतीय ज्ञान परम्परा ऋषियों की देन है। ज्ञान ही मानवीय चेतना को जागृत कर उसे सशक्त बनाता है यह विचार श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज राजकीय महाविद्यालय पलिया कलॉ-खीरी के रजत जयंती समारोह के अवसर पर अध्यक्षता करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष प्रोफेसर ओम प्रकाश पाण्डेय ने व्यक्त किये। प्रोफेसर पाण्डेय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के योगदान की चर्चा की। उन्होने बताया कि उच्च शिक्षा छात्रों की चिंतन शक्ति एवं अनुसंधानात्मक प्रवृति को विकसित करती है। वैदिक साहित्य के गंभीर चिंतक एवं लेखक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के विजिटिंग प्रोफेसर अमलधारी सिंह ने कहा कि वेद आध्यात्म प्रधान भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है। वेदो में ब्रह्मविद्या के साथ-साथ कर्मकाण्ड तथा जीवनोपयोगी विविध मानवीय मूल्यों की व्याख्या की गयी हैं। वेद विद्या के कारण ही भारत विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हुआ है। प्रयागराज विश्वविध्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर प्रयाग नारायन मिश्र ने अपने विस्तृत व्याख्ययान में बताया कि शिक्षा विषय ज्ञान के साथ-साथ सदाचारवान बनाती है क्योकि ज्ञान की सार्थकता किया अथवा व्यवहार में ही है। डा० ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि साहित्य अतीत की घटनाओं एवं परिस्थितियों का मूल्यांकन करते हुए सम-साययिक अपेक्षाओ को रेखंकित करता है। भूगोल विषय के विशेषज्ञ डा० महादेव सिंह ने कहा कि भारतीय चिंतन धारा जीव मात्र के प्रति प्रेम एवं सर्जनात्मक दृष्टि प्रदान करती है। सम्मानित अधिवक्ता श्री संजीव कुमार त्रिवेदी ने वर्तमान युवा वर्ग में बढ़ती अनुशासनात्मक शिथिलता पर चिंता व्यक्त की। मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए माननीय क्षेत्रीय विधायक रोमी साहनी ने शिक्षा के क्षेत्र में शासन द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा करते हुए बालकों के साथ बालिकाओं की उत्तरोत्तर बढ़ती उपलब्धियों की सराहना की। उन्होने कहा कि समाज एवं राष्ट्र निर्माण में बालिकाओं की शिक्षा समाज एवं राजनीति सब कहीं बढ़ चढ़कर भाग लेने से राष्ट्र का बहुमुखी विकास होता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सूर्यप्रकाश शुक्ल ने महाविद्यालय के गौरवपूर्ण अतीत का उल्लेख करते हुए समय-समय पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं आदि में सहभाग करने तथा प्रथम, द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत थारू बालिकाओ द्वारा होली एवं कजरी नृत्य प्रस्तुत किया गया। समारोह में महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका “शारदा” का विमोचन समागत विद्वान अतिथियों ने किया।समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य सह आचार्य तथा विभिन्न शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति से समारोह का गौरव बढ़ाया। इनमें पूर्व प्राचार्य डा० ऋषिराम राजपूत, युवराज दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखीमपुर-खीरी के प्राचार्य डॉ. हेमंत पाल , संजीव कुमार त्रिवेदी (अधिवक्ता) आर्यकन्या पी०जी० कालेज की पूर्व प्राचार्या डा० सुरचना त्रिवेदी, आचार्य धनुषधारी द्विवेदी, श्रीमती मीरा मिश्रा प्रयागराज, वरिष्ठ सहायक विश्राम, कनिष्ठ सहायक आकर्ष विश्वकर्मा, पुस्तकालय परिचर अजय कुमार यादव, चौकीदार अशोक, धोखेराम, परविन्दर के साथ-साथ नगर के सम्मानित पत्रकार बन्धु आदि प्रमुख है।समागत विद्वान अतिथियों का अत्यंत भावपूर्ण अभिनंदन एवं अंत में आभार प्रदर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य ने किया कार्यक्रम का वैदुष्यपूर्ण संचालन करते हुए डा० शिवाकन्त शुक्ल ने कहा कि महाविद्यालयी समारोह छात्रों को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करते है।