पलिया कलां (खीरी) उत्तर प्रदेश में गैण्डों की पुर्नस्थापना की नई इबारत लिख रहा दुधवा ,स्वछंद विचरण हेतु अवमुक्त करने के तीसरे चरण के दूसरे दिन अवमुक्त हुए 03 और गैण्डे ।
दिन के प्रथम प्रहर में 01 नर एवं 01 मादा तथा दूसरे प्रहर में 01 मादा हुई अवमुक्त।
सम्पूर्ण कार्यवाही विशेषज्ञों एवं उच्चाधिकारियों के निर्देशन एवं उपस्थिति में दुधवा टाइगर रिजर्व में स्वछंद विचरण हेतु तीसरे चरण के कार्यक्रम के पहले दिन जहां आशानुरुप सफलता नहीं मिल सकी और कोई गैण्डा का पता नहीं लग सका था।वहीं आज दूसरे दिन के दोनों प्रहरों में कुल 03 गैण्डों को स्वच्छं विचरण हेतु उच्चाधिकारियों एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति में अवमुक्त कर दिया गया।
आज दिन के प्रथम प्रहर में गैण्डों की खोजबीन हेतु लगी सशक्त महावत एवं चाराकटरों की टीमों द्वारा सर्वप्रथम 01 नर गैण्डे की खोज की गई। नर गैण्डे का पता लगते हुए राजकीय हाथियों की सहायता से गैण्डे का भलीभॉति चिन्हित कर लेने के उपरांत उसको चारों तरफ से घेराबंदी करने के उपरांत उच्चाधिकारियों को सूचना प्रदान की गई। सूचना प्राप्त होते ही उच्चाधिकारियों के निर्देशन में पशुचिकित्सकों की टीम मय विशेषज्ञों एवं उच्चाधिकारियोें सहित मौके पर पहुॅचे तथा नर को ट्रेंकुलाइन किया गया, तदुपरांत सूचना प्रेषित करने के उपरांत मौके पर लाजिस्टक व अन्य टीमों द्वारा पहुॅचकर गैण्डे को केज में सु रक्षित कर बाहर लाया गया।
प्रथम गैण्डा ट्रैंकुलाइज होते ही जैसे ही लाजिस्टिक एवं अन्य टीमों द्वारा अपना कार्य प्रारंभ किया गया वैसे ही महावत एवं चाराकटरों द्वारा दूसरे पूर्व से चिन्हित मादा गैण्डों की खोजबीन प्रारंभ कर दी गई। आज अच्छे मौसम के साथ महावत एवं चाराकटरों को अनुभव का अच्छा साथ मिला और जल्द ही 01 मादा गैण्डा की खोज कर ली गई। मौके पर तत्काल उच्चाधिकारियों पशु चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ पहुॅचकर उसे ट्रेंकुलाइज किया गया, तदुपरांत अन्य टीमों द्वारा अपनी-अपनी कार्यवाही पूर्ण कर उसके केज में सुरक्षित कर बाहर लाया गया।
दोनों गैण्डों को पूर्व से नियत किए गए अवमुक्त स्थल एसडी सिंह मचान फांटा में उच्चाधिकारियों एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति में स्वछंद विचरण हेतु अवमुक्त कर दिया गया।
आज दिन के प्रथम प्रहर में आशानुरुप कार्यवाही संपन्न हो जाने के उपरांत समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों, विशेषज्ञों एवं टीमों में उत्साह अपने चरम पर था, जिसका परिणाम यह रहा है कि महावत एवं चाराकटरों द्वारा दूसरे प्रहर में भी अत्यंत कम समय में 01 और मादा गैण्डे को चिन्हित कर लिया गया, जिसे ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित एवं पूर्व नियत स्थल पर स्वछंद विचरण हेतु अवमुक्त कर दिया गया।
इस कार्य हेतु नियत टीमों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों में तीन गैण्डों के सफलतापूवर्क अवमुक्त करने की कार्यवाही के उपरांत भी उत्साह एवं जोश में कोई कमी नहीं दिख रही थी, परंतु कल से राजकीय हांथी खोजबीन में लगे होने के कारण उनको आराम दिए जाने के दृष्टिगत शेष कार्यवाही कल के लिए छोड़ दी गई।
यह पूरा कार्यक्रम डॉ0 एच0 राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर-खीरी के निर्देशन में जगदीश आर0 उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी की उपस्थिति में संपादित हुआ। इसमें पद्मश्री एवं विशेषज्ञ डॉ0 के0के0 षर्मा, प्रो0 एवं हेड डिपार्टमेंट आफ सर्जरी एवं रेडियोलाजी, कालेज आफ वेटनरी साइंस, गुआहाटी असम, अमित शर्मा, लीड कंजर्वेषन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, डॉ0 जी0 अरिंद्रन, डायरेक्टर, आईजीसीएमसी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, नई दिल्ली, डॉ0 मुदित गुप्ता, विश्व प्रकृति निधि तराई आर्कलैण्ड, डॉ0 मो0 तलहा, पशु चिकित्सक, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी, डॉ0 दयाषंकर, पशु चिकित्सक, दुधवा टाइगर रिजर्व (बफर जोन), लखीमपुर-खीरी, डॉ0 दीपक वर्मा, पशु चिकित्सक, कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग, बहराइच, रमेश कुमार, प्रधान लिपिक एवं शिविर प्रभारी, रोहित रवि, सीनियर प्रोजेक्ट आफिसर, विष्व प्रकृति निधि, संदीप फार्मासिस्ट, सुशांत सिंह, भण्डार प्रभारी, सुरेन्द्र कुमार, उप क्षेत्रीय वन अधिकारी, विपिन कपूर सैनी, आउटरीच प्रोग्राम इंचार्ज, अपूर्व गुप्ता, बायोलाजिस्ट, स्वास्थ्य टीम, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पलिया, दुधवा टाइगर कंजर्वेशन टीम, बायोलाजिस्ट, क्षेत्रीय वन अधिकारी, दक्षिण सोनारीपुर, दुधवा, बेलरायां, महावत, चाराकटर, व अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।