

(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) दुधवा टाइगर रिजर्व में 12–13 मार्च 2026 को लघु वन्य बिल्लियों के संरक्षण विषय पर तृतीय ट्रांसबाउंडरी बैठक का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत, नेपाल और भूटान के वन अधिकारी, वैज्ञानिक, संरक्षण विशेषज्ञ और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक का उद्देश्य सीमापार परिदृश्यों में पाई जाने वाली छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक सहयोग, अनुभव साझा करना और संयुक्त रणनीति विकसित करना था।
दो दिवसीय इस बैठक में छोटे मांसाहारी जीवों, विशेष रूप से लघु वन्य बिल्लियों की प्रजातीय विविधता, आवास संरक्षण, निगरानी प्रणाली तथा संरक्षण चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। यह प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि ये छोटे स्तनधारियों और कृन्तकों की आबादी को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं।
बैठक के दौरान डव्लू बल्लू एफ इंडिया तथा परियोजना सहयोगियों द्वारा तैयार “दुधवा परिदृश्य की लघु वन्य बिल्लियों की पहचान पुस्तिका आइडेंटिफिकेशन मैन्युअल का भी विमोचन एवं प्रस्तुतीकरण किया गया। यह पुस्तिका वन कर्मियों, शोधकर्ताओं और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण फील्ड गाइड के रूप में कार्य करेगी, जिससे इन प्रजातियों की पहचान, दस्तावेज़ीकरण और निगरानी को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
इस बैठक में उत्तर प्रदेश वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विभिन्न संरक्षण संगठनों के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अनुराधा वेमुरी प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ग्लोबल टाइगर फोरमकके महासचिव राजेश गपाल तथा उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट कॉरपोरेशन के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक संजय पाठक सहित अनेक विशेषज्ञों, प्रतिनिधियों और दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों एवं वनकर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत, नेपाल और भूटान मिलकर एक सहयोगी नेटवर्क समूह का गठन करेंगे, जो लघु वन्य बिल्लियों पर सिचुएशन एनालिसिस एसाइसमेंट तैयार करेगा। इस आकलन के माध्यम से प्रजातियों के वितरण, आवास की स्थिति, संभावित खतरों तथा संरक्षण की प्राथमिकताओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा और इसके आधार पर भविष्य की संयुक्त संरक्षण रणनीतियाँ तैयार की जाएंगी।
इस बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि लघु वन्य बिल्लियों के संरक्षण के लिए सीमापार सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, सामुदायिक सहभागिता और बेहतर निगरानी प्रणाली अत्यंत आवश्यक है। दुधवा टाइगर रिजर्व द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी करना तराई परिदृश्य में जैव विविधता संरक्षण और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अंततः यह बैठक ग्लोबल टाइगर फोरमके अंतर्गत संचालित GEF-7 परियोजना “Strengthening Conservation and Resilience of Globally Significant Wild Cat Landscapes through a Focus on Small Cat and Leopard Conservation” के अंतर्गत आयोजित ट्रांस बाउंड्री मीटिंगका एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही, जिसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में छोटी जंगली बिल्लियों और तेंदुओं के संरक्षण को मजबूत करना तथा वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण वन्य बिल्ली परिदृश्यों की संरक्षण क्षमता को बढ़ाना है। इस बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश, लखनऊ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव, उत्तर प्रदेश, लखनऊ, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर, उत्तर प्रदेश, लखनऊ, डॉ0 रिद्धिमा सोलंकी, प्रोग्राम मैनेजर सीवान, श्री मनोज कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर, डब्ल्यूसीसीबी, पवन एआईजी एनटीसीए, धवन रावत, प्रभागीय वनाधिकारी अरुणांचल प्रदेश, चंदन राय, सीनियर फील्ड बायोलाजिस्ट अरुणांचल प्रदेश, डॉ0 अंकिता भटटाचार्य विश्व प्रकृति निधि, अबिर मान सिंचुरी नेचर कंजर्वेशन डिवीजन, रायल गर्वनमंेंट आफ भूटान, संजय ल्युनडप, सैकटंेग वन्य जीव विहार, रायल गर्वनमेंटआफ भूटान, उग्येन क्षेरिंग, जोमोत्संगखा वन्यजीव अभयारण्य, रायल गर्वनमेंट आफ भूटान, डॉ0 एस0पी0 गोयल, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इण्डिया, उर्जित भटठ, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इण्डिया, चंद्रशेखर, चीफ वाइल्डलाइफ वार्डेन, शुक्लाफांटा, नेपाल, डॉ0 राजेश गोपाल, सेक्रेटरी जनरल ग्लोबल टाइगर फोरम, डॉ0 एच0एस0 नेगी, अरुन कुमार, वरिष्ठ समन्वयक, ग्लोबल टाइगर फोरम, प्रमोद यादव, डॉ0 एच0 राजामोहन, मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर-खीरी, जगदीश आर0, उप निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग, पलिया-खीरी, अक्षय पोपट वाले, भा0व0से0 प्रो0, प्रभागीय वनाधिकारी, कतर्नियाघाट, वन्य जीव प्रभाग, बहराइच, प्रभागीय वनाधिकारी, दक्षिण खीरी वन प्रभाग, लखीमपुर-खीरी व विश्व प्रकृति निधि, दुधवा फाउण्डेशन की टीम, के साथ अन्य अधिकारी कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
