(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग पलिया खीरी की दक्षिण सोनारीपुर रेंज में स्थापित प्रथम गैण्डा पुनर्वास केंद्र से आज एक दुखद समाचार। दुधवा टाइगर रिजर्व के प्रथम गैण्डा पुनर्वास में वर्तमान में 40 से अधिक गैण्डा विद्यमान हैं। इस कारण पूर्व में कई बार आपसी द्वंद एवं बाघ से द्वंद के चलते कुछ गैण्डे हताहत हो चुके हैं। परंतु विगत कई वर्षों से प्रथम गैण्डा पुनर्वास केंद्र में विचरण कर रहे गैण्डे सुरक्षित थे। परंतु आज प्रातः कालीन गैण्डा मानीटरिंग टीम प्रत्येक दिन की भांति महावत सर्वश्री रामेश्वर, इरसाद, ब्रम्हादीन, अयूब, चाराकटर इश्तियाक, रियासुद्दीन, देशराज, सतीश, सफीक द्वारा राजकीय हांथी रुपकली, चमेली, सुलोचना, किरन, कावेरी, कवनी, भास्कर, गजराज, पवनकली, विनायक, सुहेली से मानीटरिंग कर रही थी। मानीटरिंग करते समय प्रथम गैण्डा पुनर्वास केंद्र के अमहा ताल में प्रातः लगभग 7.30 बजे एक टाइगर पानी में लगभग आधे डुबे हुए गैण्डा के ऊपर दिखाई दिया। टीम द्वारा पूरी सावधानी पूर्वक उसका निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गैण्डा टाइगर द्वारा घायल किए जाने की पुष्टि हुई तथा गैण्डे के शरीर से कोई हरकत न मिलने पर उसके मृत होने की सूचना तत्काल प्रभाव से सक्षम स्तर को प्रेषित की गई। सूचना प्राप्त होते ही मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग पलिया-खीरी द्वारा प्राप्त निर्देशानुसार गैण्डा और बाघ को पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंचने तक छेड़छाड़ करने से रोकते हुए पैनल गठन की कार्यवाही की गई। सक्षम स्तर से बनाए गए पैनल के चिकित्सकों द्वारा उसका निरीक्षण कर मादा गैण्डा होने तथा बाघ द्वारा ही मारे जाने की पुष्टि की गई, तदुपरांत एसओपी के अनुसार शव विच्छेदन उपरांत शव का निस्तारण कर दिया गया। मानीटरिंग टीम द्वारा मृत गैण्डा की पहचान राजेश्वरी मादा गैण्डा के रूप में की गई है।

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