(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलिया कलां (खीरी) दिनाँक 18 फरवरी को दुधवा टाईगर रिजर्व के पर्यटन परिसर के ऑडिटोरियम में मानव हाथी संघर्ष प्रबंधन कार्यशाला आयोजित हुआ कार्यशाला फील्ड डायरेक्टर दुधवा टाईगर रिजर्व लखीमपुर खीरी के निर्देशन में दुधवा टाईगर रिजर्व और डब्लू डब्लू एफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता और प्रशिक्षक डब्लू डब्लू एफ इंडिया नई दिल्ली से आये एलीफैंट प्रोग्राम के प्रमुख डॉ अरित्र खेत्री और वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन रहे। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उप निदेशक दुधवा टाईगर रिजर्व जगदीश आर ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला और हाथियों की जंगल में निगरानी, उनके प्राकृतिक वास में सुधार और पूर्वानुमान से ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना प्रेषित करने पर बल दिया जिससे ग्रामीण अपने फसलों की सुरक्षा में आवश्यक कार्यवाही कर सके उन्होंने समुदाय आधारित क्रियाकलाप को अपनाने हेतु संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया और तकनीकी आधारित क्रियाकलाप पर सहयोग हेतु डब्लू डब्लू एफ से अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि हम किसी हाथी को रेडियो कॉलर करते हैं तो तो उसके मूवमेंट का पैटर्न पता चल जाएगा जिससे हम उनके संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा में आवश्यक कार्यवाही कर सकते हैं ।
दबीर हसन ने तराई हाथी रिजर्व के बारे में विस्तार से बताया तथा कतर्नियाघाट में हाथी मानव संघर्ष कम करने में समुदाय आधारित अभ्यास जैसे गजमित्रोंं के गठन, नेपाल राष्ट्र के समुदाय के साथ समन्वय, हल्दी की खेती और कॉरिडोर संरक्षण जैसे उपाय अपनाने से हाथी मानव सहअस्तित्व का प्रस्तुतीकरण किया तथा मुआवजे की प्रक्रिया पर बताया। क्षेत्रीय वनाधिकारी मझगई अंकित सिंह, क्षेत्रीय वनाधिकारी दक्षिण निघासन रेंज मोबिन आरिफ, क्षेत्रीय वनाधिकारी मोहम्मदी निर्भय प्रताप शाही और उप क्षेत्रीय वनाधिकारी गोला रेंज राम नरेश वर्मा ने हाथी मानव संघर्ष पर अपने अनुभवों और उसकी चुनौतियों से अवगत कराया तथा अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए। डॉ अरित्र खेत्री ने रेडियो टेलीमेटरी विधि से हाथियों की निगरान के मॉडल तथा हाथियों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक वास में सुधार हेतु सुझाव प्रदान किया तथा हाथियों के संरक्षण में वन विभागऔर स्थानीय समुदाय को सहायता देने हेतु हर सम्भव सहयोग का आश्वासन दिया। राजस्व विभाग से आये प्रतिनिधि गोला के नायब तहसीलदार ताहिर परवेज़ ने प्रतिभागियों को आपदा राहत निधि से मुआवजे की प्रक्रिया को बताया और कहा कि राजस्व विभाग मुवाअजे जैसे संवेदनशील कार्य पर अत्यंत शीघ्र रिपोर्टिंग करने हेतु तत्पर है और जो भी प्रार्थना पत्र आते हैं तत्काल निस्तारित किए जाते हैं इस कार्यशाला से उनको हाथी संरक्षण में काफी जानकारी मिली है जिसका उपयोग वह अपने विभाग में करेंगे। कार्यशाला में हाथी प्रभावित गाँवों के ग्राम प्रधानों ने अपनी समस्याओं एवं सुझावों को प्रस्तुत किया। उप प्रभागीय वनाधिकारी निघासन मनोज कुमार तिवारी ने दुधवा टाईगर रिजर्व में हाथी मानव सहअस्तित्व पर बढ़ावा देने हेतु स्थानीय समुदाय को सहयोग प्रदान करने, इको विकास समितियों को प्रभावी बनाने, वन विभाग के वाचरों को सहयोग , बाघ मित्रों और गज मित्रों को सहयोग प्रदान करने एवं वन विभाग के ढांचागत विकास और अन्य सुविधाओं को मजबूत करने पर बल दिया और कहा कि यह एक अत्यंत चुनौतियों से भरा हुआ कार्य है जिसको वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी नियमित करते हैं उन्होंने मुवावजे की प्रक्रिया और बजट हेतु उच्च अधिकारियों को विभिन्न माध्यमों से अवगत कराया जाएगा। इस कार्यक्रम में स्थानीय ग्राम प्रधानों ने भी अपने विचार एवं सुझावों को प्रस्तुत किया। अंत में उप प्रभागीय वनाधिकारी बेलरायां दीपक कुमार पांडे ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया और सफल आयोजन हेतु डब्लू डब्लू एफ इंडिया का सराहना किया ।कार्यशाला में दुधवा नेशनल पार्क के वार्डन महावीर प्रसाद तथा समस्त क्षेत्रीय वनाधिकारी और बफर जोन के समस्त क्षेत्रीय वनाधिकारी और फील्ड स्टाफ तथा संबंधित गांवों के ग्राम प्रधान और ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डब्लू डब्लू एफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रोहित रवि, सलाहकार नाशित अली, सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम, बायोलॉजिसट अपूर्व गुप्ता उपस्थित रहे।
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