(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) दिनांक 03.02.2026 को कमांडेंट रबीन्द्र कुमार राजेश्वरी की उपस्थिति में 39वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, पलिया की सीमा चौकी गौरीफंटा के अंतर्गत संचालित व्यापार एवं परिगमन मार्ग गौरीफंटा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नेपाल से भारत की तरफ जाने वाले लोगों के सामान की जांच हेतु एक्स-रे बैगेज स्कैनिंग मशीन स्थापित की गई है । सीमा क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, तस्करी की संभावनाओं तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है । एक्स-रे बैगेज मशीन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन करने वाले लोगों के सामान की सटीक एवं पूर्ण जांच सुनिश्चित करना, अवैध वस्तुओं/सामग्री, प्रतिबंधित सामान, मादक पदार्थ, हथियार, विस्फोटक सामग्री आदि की तस्करी पर अंकुश लगाना, सुरक्षा जांच को तेज, पारदर्शी और तकनीकी रूप से प्रभावी बनाना, यात्रियों एवं व्यापारिक आवागमन को सुव्यवस्थित और सुरक्षित करना, सीमा पर तैनात कार्मिकों की कार्यक्षमता बढ़ाते हुए आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू करना है । मशीन की स्थापना के पश्चात अब भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन करने वाले यात्रियों के सामान की एक्स-रे स्कैनिंग द्वारा जांच की जाएगी । जिसमें प्रत्येक यात्री/आवागमनकर्ता के सामान को मशीन से स्कैन कर संदिग्ध वस्तुओं की पहचान कर पूर्ण जांच के उपरान्त ही यात्रियों को सीमा मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी । यह व्यवस्था सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ जांच प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित एवं समयबद्ध भी बनाएगी । इस अवसर पर 39वीं वाहिनी के कमांडेंट द्वारा मशीन की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया तथा संबंधित कार्मिकों को मशीन संचालन संबंधी एवं सुरक्षा जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा यह भी बताया गया कि आधुनिक तकनीक से लैस यह व्यवस्था सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी । 39वीं वाहिनी, स.सी.बल, पलिया द्वारा सीमा क्षेत्र में सुरक्षा, निगरानी और नियंत्रण को सुदृढ़ करने हेतु लगातार प्रयास किए जा रहे हैं । एक्स-रे बैगेज मशीन की स्थापना से सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत होगा, यात्रियों एवं व्यापारियों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी तथा सीमा प्रबंधन को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित किया जा सकेगा ।
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