(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलियाकलां (लखीमपुर ) : बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल में आज कमलनयन बजाज की 111वीं जयंती धूम धाम से मनाया गया। इस मौके पर पलिया चीनी मिल में यूनिट हेड ओपी चौहान ने माल्यार्पण किया। गोला में राकेश यादव ने माल्यार्पण किया तथा खंभारखेडा में यूनिट हेड अवधेश गुप्ता ने माल्यार्पण किया। इसके साथ ही उनके पुत्र शिशिर बजाज ने एआई जेनरेटेड वीडियो जारी कर अपने पिता के औद्दोगिक व स्वतंत्रता आंदोलन में किये गए उनके योगदान की जानकारी दी।
एआई-निर्मित श्रद्धांजलि वीडियो कमल नयन बजाज के महान व्यक्तित्व के असाधारण जीवन और युग को जीवंत करता है, जिन्होंने बजाज समूह की सच्ची उद्यमशील नींव रखी और भारत की आत्म निर्भरता की यात्रा को आकार दिया।
वीडियो में कमलनयन बजाज की उस यात्रा को दर्शाया गया है जिसमें वे महात्मा गांधी से प्रेरित एक युवा स्वतंत्रता सेनानी से एक दूरदर्शी उद्योगपति और राष्ट्रनिर्माता बने। वे मानते थे कि व्यवसाय केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा करने का एक देशभक्ति का कर्तव्य है। 23 जनवरी 1915 को जमनालाल बजाज और जानकीदेवी बजाज के घर जन्मे कमलनयन बजाज तीन महान व्यक्तित्वों के नैतिक प्रभाव में पले-बढ़े।
मात्र 15 वर्ष की आयु में उन्होंने दांडी मार्च में भाग लिया और स्वदेशी व खादी आंदोलनों के प्रारंभिक समर्थक बने। एआई वीडियो में यह दर्शाया गया है कि कैसे कमलनयन बजाज ने सचेत रूप से ऐसे उद्योगों की स्थापना की, जिन्होंने भारत की आयात पर निर्भरता को कम किया और “आत्मनिर्भर भारत” की परिकल्पना को साकार किया। उत्तर प्रदेश की गोला चीनी मिल की स्थापना इसी का परिणाम था।
ऐसा ही सहयोग बजाज इलेक्ट्रिकल्स के लिए वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फिलिप्स के साथ था। इन अग्रणी साझेदारियों ने कमलनयन बजाज को बजाज समूह का वास्तविक उद्यमी सिद्ध किया, जिन्होंने मूल्य-आधारित विरासत को एक वैश्विक स्तर पर सम्मानित औद्योगिक समूह में रूपांतरित किया।
कमलनयन बजाज 15 वर्षों तक महाराष्ट्र के वर्धा से संसद सदस्य रहे और ग्रामीण समुदायों के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए स्वयं को समर्पित किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संस्थानों को सुदृढ़ करने में निरंतर योगदान दिया। उन्होंने भारत के राजनीतिक एकीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर बजाज फाउंडेशन के चेयरमैन शिशिर बजाज ने कहा की मेरे पिता का मानना था कि जो हम बनाते हैं वह टिकाऊ होना चाहिए, और जो टिकाऊ हो, उसे समाज की सेवा करनी चाहिए। उनके लिए उद्योग, सार्वजनिक सेवा और सामाजिक संस्थान तीनों राष्ट्र निर्माण के अविभाज्य स्तंभ थे। यह श्रद्धांजलि हमारी ओर से आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाने का एक विनम्र प्रयास है कि मूल्य-आधारित उद्यमिता व्यवसाय और समाज दोनों को रूपांतरित कर सकती है। उनकी विरासत शिशिर बजाज और उनके पुत्रों के माध्यम से आगे बढ़ रही है। उनके बड़े पुत्र कुशाग्र बजाज, जो वर्तमान में उनके व्यवसाय पक्ष के चेयरमैन हैं, और छोटे पुत्र अपूर्व बजाज। वे कमलनयन बजाज के उस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं जिसमें उद्यम को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा गया है। बजाज समूह के औद्योगिक विस्तार से लेकर वर्धा, सीकर और ललितपुर में ग्रामीण विकास पहलों को गहराई देने तक, परिवार सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध बना हुआ है।
जब राष्ट्र कमलनयन बजाज को उनकी जयंती पर स्मरण कर रहा है, तब बजाज परिवार की यह संदेश दोहराती है कि सच्ची उद्यमिता केवल विस्तार से नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा और मूल्यों की संरक्षा से परिभाषित होती है।
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