(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज पलिया नगर में आज विद्या भारती अवध प्रांत के प्रदेश निरीक्ष राम सिंह , संभाग निरीक्षक सुरेश सिंह , संस्कृति बोध परियोजना के प्रमुख माननीय उत्तम (भाई साहब) का गरिमामय आगमन हुआ। उनका स्वागत विद्यालय के मुख्य द्वार पर घोष के साथ किया गया उनके आगमन से विद्यालय परिसर में हर्ष, उल्लास एवं उत्साह का वातावरण व्याप्त हो गया।विद्यालय केप्रधानाचार्य रामप्रताप सिंह ने पधारे हुए मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनका संक्षिप्त एवं प्रेरणादायी परिचय कराया।मुख्य अतिथि प्रदेश निरीक्षक राम जी सिंह , संभाग निरीक्षक सुरेश सिंह जी ने सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य , आचार्यों/ आचार्या बहनों एवं भैया/बहिनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष रूप से ध्यान आकृष्ट किया—कमजोर से कमजोर विद्यार्थियों के भी न्यूनतम 75% से अधिक अंक सुनिश्चित किए जाएँ।कुछ विद्यार्थियों का प्रदेश स्तर पर स्थान प्राप्त करना लक्ष्य बनाया जाए।कुछ विद्यार्थी प्रत्येक विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त करें, इसके लिए विशेष योजना बनाई जाए।संस्कारयुक्त शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, बाल-केंद्रित एवं क्रिया आधारित शिक्षण पद्धति को प्राथमिकता दी जाएपंचपदीय शिक्षण पद्धति एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप शिक्षण कार्य करने पर बल दिया जाए।विद्यार्थियों में समर्पण, अनुशासन एवं राष्ट्रभाव जागृत करने पर विशेष जोर दिया गया।इसके पश्चात कार्यालय का भी औचक निरीक्षण किया गया कार्यालय प्रमुख आचार्य संदीप मंदीप , महेश ने कार्यालय के सभी आवश्यक जानकारियों से उनको संतुष्ट किया ।विद्यालय के आचार्य अनुराग यादव एवं उनकी टीम के द्वारा उनको जलपान एवं भोजन कराया गया इस दौरान उन्होंने भोजन मंत्र के महत्व समझाते बताया कि भारतीय संस्कृति में भोजन मंत्र का महत्व यह है कि यह भोजन को पवित्र कर, कृतज्ञता सिखाता है, मन को एकाग्र करता है और शरीर को शुद्ध करता है, जिससे भोजन केवल पेट भरने का माध्यम न रहकर एक आध्यात्मिक प्रक्रिया बन जाता है; यह अन्न, प्रकृति, किसानों और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने और भोजन को प्रसाद में बदलने का एक तरीका है, जो मानसिक शांति और पाचन में सुधार करता है।.इस गरिमामय कार्यक्रम में विद्यालय के व्यवस्थापक रामबचन तिवारी एवं प्रबंध समिति के सभी सदस्यों की,आचार्य /आचार्या बहनों की सक्रिय सहभागिता रही ।छात्रावास के भैयायों में समाजसेवी मनीष गर्ग एवं उनकी माताजी श्रीमती कुसुम लता गर्ग ने भईयाओं में जैकेट वितरित की इसके लिए आगंतुक अतिथिमहानुभावों ने उनको सम्मानित किया। इसके पश्चात सरस्वती विद्या मंदिर के दोनों संस्कार केन्द्रो का निरीक्षण किया और भैया/ बहनों में स्वेटर वितरित किया गया संस्कार केंदो के छोटे भैया /बहनों ने अपने मनमोहन कविता/ गीत के माध्यम से आगंतुक महानुभावों का मन मोह लिया संस्कार केंद्र के प्रमुख आचार्य हंसराम वर्मा एवं उनकी सहायक आचार्या बहिन कु. पूर्णिमा, कु.मौसम की प्रशंसा की ।विद्यालय के अध्यक्ष चाँद कुमार जैन ने कहा कि “जियो और जीने दो”, हर आत्मा स्वतंत्र है और ज्ञान स्वयं में है, और क्रोध व लालच से बचना चाहिए, क्योंकि हर आत्मा अपनी कर्मों के लिए स्वयं जिम्मेदार है और अंततः सभी को मृत्यु का सामना करना है, इसलिए धैर्य और जागरूकता से जीना चाहिए और भगवान महावीर स्वामी जी से हमारी यही प्रार्थना है कि विद्यालय निस्वार्थ भाव से निरंतर प्रगति की मार्ग पर बढ़ता रहे।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के व्यवस्थापक रामबचन तिवारी ने सभी का आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि * हमारे सभी आचार्य /आचार्या बहनो ने समर्पण एवं कड़ी मेहनत और छात्रों के भविष्य के लिए अथक प्रयास किये है और भविष्य में करते रहेंगे और मैं अपने सभी आचार्य/ आचार्या बहनों से ऐसी आशा करता हूं की विद्यालय निरंतर प्रगति की मार्ग पर आप सभी के सहयोग से बढ़ता रहेगा बस यही भगवान नारायण से हमारी प्रार्थना है ।कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ अत्यंत प्रेरणादायी एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
