रसोई में गैस सिलेंडर खत्म हो जाना कभी पूरे दिन की परेशानी बन जाया करता था, लेकिन आज वही स्थिति कुछ ही मिनटों में सुलझ जाती है। ऐसा ही एक भावनात्मक अनुभव एक उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की साधारण गृहिणी अरुणा श्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे अपने पत्र में साझा किया है, जो बदलते भारत की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है।
लगभग 42 वर्षीय अरुणा श्री, जिनका विवाह वर्ष 2004 में हुआ, एक सामान्य परिवार से आती हैं। अपने पत्र में उन्होंने 2014 से पहले के समय को याद करते हुए लिखा कि उस दौर में एलपीजी गैस कनेक्शन मिलना आसान नहीं था। वर्षों इंतजार, सिफारिशें, गैस बुकिंग के लिए लंबी कतारें और भरा सिलेंडर पाने के लिए एजेंसी के चक्कर आम बात थी। कई बार मजबूरी में ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ती थी, जिससे आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव दोनों बढ़ जाते थे।
उन्होंने हाल की एक छोटी-सी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख किया। एक दिन भोजन बनाते समय अचानक गैस खत्म हो गई। पहले ऐसे हालात में पूरा काम ठप हो जाता, लेकिन अब उनके पति के एक फोन पर मात्र 15 मिनट के भीतर भरा हुआ सिलेंडर घर पहुँच गया और भोजन समय पर तैयार हो सका। अरुणा जी के अनुसार, यह भले ही छोटी घटना लगे, लेकिन इसमें आज और 2004 के भारत के बीच का बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।
अपने पत्र में उन्होंने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन, मोबाइल से बुकिंग, घर पर सिलेंडर डिलीवरी और सब्सिडी के सीधे बैंक खाते में आने जैसी व्यवस्थाओं के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि इन छोटे-छोटे सुधारों ने आम महिलाओं के जीवन को कहीं अधिक सुरक्षित, सहज और सम्मानजनक बना दिया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उत्तर में कहा कि ऐसे आत्मीय पत्र उन्हें राष्ट्रसेवा के लिए नई ऊर्जा देते हैं। उन्होंने बिजली, पानी, शौचालय, पक्का मकान, उज्ज्वला योजना, बैंकिंग सुविधा और मुद्रा योजना जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से देश की महिलाएँ सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व में आगे बढ़ते भारत पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों का आशीर्वाद उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
अरुणा श्री का प्रधानमंत्री को लिखा यह पत्र बताता है कि जब नीतियाँ ज़मीन पर उतरती हैं, तो वे सिर्फ योजनाएँ नहीं रह जातीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में भरोसे और सुकून का रूप ले लेती हैं—और यही विकसित भारत की असली पहचान है।

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