(ओमप्रकाश ‘सुमन’)
पलिया कलां (खीरी) उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में 2007 में पाल गेटी अवार्ड , पद्मश्री, पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित विली अर्जन सिंह वन्य जीव जंतु प्रेमी जो कभी शिकारी भी रहे थे वह एवं कई मान्य कई विद्वान व्यक्तियों में सेवानिवृत्ति न्यायमूर्ति एस एन श्रीवास्तव की संस्था रूल ऑफ ला सोसायटी के द्वारा एक रिट याचिका इस आशय से योजित की गई थी कि दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र से गुजर रही रेल लाइन तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पत्र के द्वारा हटाने भविष्य में मीटर गेज से ब्रॉड गेज लाइन दुधवा पार्क से बाहर निकाली जाए। इस याचिका में कई दुधवा के पर्यटन विकास के कई मुद्दे भी उठाए गए थे। इसके बाद विली अर्जन सिंह ने एक और याचिका माननीय उच्च न्यायालय में इस प्रार्थना से दायर की कि गौरीफंटा- चंदन चौकी की उखाड़ी गई रेल लाइन की जमीन दुधवा पार्क को रेल प्रशासन के द्वारा स्थानांतरित कर दी जाए। तथा गौरीफंटा – चंदनचौकी मार्ग बंद किया जाए उस पर निकल रहे गन्ने से भरे ट्रक व भारी वाहनों के द्वारा वन्य जीव जंतुओं को नुकसान होता है ।और दुधवा के अंदर से सूरमा गांव भी हटाया जाए। चंदन चौकी, गौरी फंटा के मार्ग व सूरमा गांव हटाने संबंधी याचिका के विरोध की कार्यवाही संबंधित प्रधानों की ओर से चित्रांगदा नारायण एडवोकेट द्वारा की जा रही है याचिका को निरस्त करने का भी आवेदन दिया गया है।और अमान परिवर्तन जंगल से बाहर किया जाए । इसके बाद सतीश मिश्रा एडवोकेट ने हाई कोर्ट में वन्य जीव जंतुओं के संरक्षक तथा कौशलेंद्र सिंह वन्य जीव जंतुओं के प्रेमी द्वारा पुनः एक नई रिट याचिका योजित की गई जिसमें दुधवा पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जीव जंतुओं वन्य प्राणियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए और अनेक मुद्दे उठाए गए थे। यह सभी याचिकाएं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विगत 18 वर्षों से अनेकों बार सूचीबद्ध हुईं ।और वन्य जीव जंतुओं के संरक्षण हेतु माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अनेकों आदेश पारित किए गए ।इसके कारण भी वन विभाग रेल विभाग में मीटर गेज से ब्रॉड गेज अमान परिवर्तन का कोई निर्णय नहीं हो सका। जिसके कारण कई जनपदों की सीमावर्ती क्षेत्र की जनता लगभग 50 से 60 लाख के हितों को प्रभावित किया गया ।रेल अमान परिवर्तन नही होने से इन सब का बहुत नुकसान हुआ । 14 जुलाई 2025 को रेलवे बोर्ड नई दिल्ली द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार अपने रेल लाइन को जंगल से बाहर निकालने के लिए भीरा – रायबोझा का सर्वे का आदेश हो गया । इस आदेश के होने से छुब्ध होकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्यारेलाल फलाहारी गौ सेवा फाउंडेशन के मंत्री समर्थ गुप्ता द्वारा जनहित याचिका योजित करके माननीय उच्च न्यायालय से प्रार्थना की गई कि वर्तमान सर्वे में है भीरा से रायबोझा के सर्वे में रेलवे स्टेशन पलिया, बेलरायां, तिकुनियां आदि को भी शामिल किया जाए। उक्त याचिका की अंतिम सुनवाई दिनांक 10 सितंबर 2025 को हुई उच्च न्यायालय की खंडपीठ लखनऊ के न्याय मूर्ति रंजन राय एवं मंजीव शुक्ला ने भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ताओं तथा याची के अधिवक्ता चित्रांगदा नारायण को सुनने के बाद प्रकरण में जो आदेश पारित किया है उसमें 18 वर्षों से रेल के अमान परिवर्तन संबंधी मीटर गेज से ब्राड गेज में होना था जो बाधायें थी उनका अंत हो गया है। क्योंकि न्यायालय ने जनता की मांग पत्र जो नानपारा से मैलानी चालू मीटर गेज लाइन पर ही ब्रॉड गेज करने की योजना की गई थी। चार माह के अंदर अपने सर्वे सुनिश्चित करने संबंधी निर्णय दिया । इस मामले में जनप्रतिनिधियों ने भी सहयोग की पुर जोर कोशिश करने का आश्वासन दिया है ।
